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अवमानना ​​कार्रवाई का अनुरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं ने 'प्रथम दृष्टया' मामला बनाया है : न्यायालय

नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने रविवार को कहा कि उन अवमानना ​​याचिकाकर्ताओं ने ‘‘प्रथम दृष्टया’’ एक मामला बना लिया है, जिन्होंने आरोप लगाया था कि कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन के कारण दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूरी तरह रोक न लगाने संबंधी शीर्ष अदालत के निर्देश का उल्लंघन किया गया।

एक विशेष सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने गृह मंत्रालय के सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) की अध्यक्ष डी. तारा को नोटिस जारी किए।

पीठ ने कहा, ‘‘सभी पक्षों के वकीलों की दलीलों पर विचार करने और अवमानना ​​याचिका में दिए गए बयानों का अवलोकन करने के बाद, हमारी राय है कि याचिकाकर्ताओं ने प्रथम दृष्टया एक मामला बना लिया है।’’

न्यायालय ने कहा, ‘‘हम कथित तौर पर अदालत की अवमानना ​​करने वालों को नोटिस जारी करते हैं। उन्हें निर्देश दिया जाता है कि वे 13 अक्टूबर 2026 तक, हमारे पूर्व के आदेश के मुताबिक, अनुपालन रिपोर्ट सहित उक्त याचिका पर जवाबी हलफनामा दाखिल करें। इस दौरान उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है।’’

वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर एक याचिका में कहा गया है कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर क्रूर हमला और न्यायालय के आदेशों की पूरी तरह अनदेखी करना, दिल्ली मेट्रो, दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार द्वारा जान-बूझकर की गई कोशिश है, और इससे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।

याचिका में अदालत के 9 अक्टूबर के उस आदेश का जिक्र किया गया है, जो विरोध-प्रदर्शन के कारण 57 मेट्रो स्टेशन पर प्रवेश एवं निकास बंद कर दिये जाने तथा दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने के खिलाफ एक अलग याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया था।

निर्वाचन आयोग की कार्यशैली को लेकर, कॉजपा और कुछ छात्र संगठनों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था।

शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति बागची एवं न्यायमूर्ति मोहना की पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करे कि विरोध प्रदर्शन के कारण 10 अक्टूबर को दिल्ली में मेट्रो सेवाएं और राष्ट्रीय राजधानी आने वाली ट्रेनों की आवाजाही पर ‘‘पूरी तरह से रोक’’ न लगे, क्योंकि वे सब कुछ ठप नहीं कर सकते।

न्यायालय ने कहा था कि भले ही कानून लागू करने वाली एजेंसियों को अनियंत्रित गतिविधियों को रोकने के लिए कदम उठाने का अधिकार है, लेकिन नागरिकों को बेवजह परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप