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कॉजपा का प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प, दिल्ली में ‘आपातकाल जैसी स्थिति’ का आरोप लगाया

नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर (भाषा) हिरासत से रिहा होने के कुछ घंटे बाद कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखने का रविवार को संकल्प लिया और कहा कि प्रदर्शन का विस्तार अब देशभर में होगा।

कॉजपा के सौरव दास ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने ‘‘आपातकाल जैसी स्थिति’’ पैदा कर दी है और देश को अपने ही नागरिकों के खिलाफ खड़ा कर दिया है।

दास ने कहा कि पुलिस ने बिना किसी औपचारिक नोटिस के उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके फोन जब्त कर लिए गए और उन्हें वकील से भी संपर्क नहीं करने दिया गया। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि उनके फोन से छेड़छाड़ की गई हो सकती है।

रिहाई के लिए लगाई गई शर्त का उल्लेख करते हुए दास ने कहा, ‘‘उन्होंने कहा है कि एक साल तक शांति भंग नहीं होनी चाहिए। शांति भंग करने का काम (प्रधानमंत्री) नरेन्द्र मोदी, (गृह मंत्री) अमित शाह और ज्ञानेश कुमार ने किया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रदर्शन जारी हैं... प्रदर्शन सिर्फ दिल्ली में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में होंगे।’’

कॉजपा नेता ने आरोप लगाया कि सरकार मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) को बचाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम मोदी और शाह से पूछना चाहते हैं कि आप ज्ञानेश कुमार को बचाने की कोशिश क्यों कर रहे हैं?’’

दास ने 2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट के नतीजे का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि क्या कुमार को नतीजों की पहले से जानकारी थी और क्या इसी वजह से सरकार कथित तौर पर उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है।

वर्ष 2024 में मतगणना के दौरान एक समय वाराणसी सीट पर मोदी कांग्रेस के अजय राय से पीछे चल रहे थे, लेकिन बाद में उन्होंने यह सीट जीत ली थी।

दास ने सवाल किया, ‘‘मोदी पीछे चल रहे थे और फिर जीत गए। क्या ज्ञानेश को पता है कि ऐसा कैसे हुआ?’’

उन्होंने कहा, ‘‘देश के युवा जाग गए हैं। जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक सिर्फ दिल्ली में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में प्रदर्शन होंगे।’’

दास ने राजनीतिक दलों से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की।

उन्होंने कहा, ‘‘विचारधारा चाहे जो भी हो, सभी राजनीतिक दलों को एसआईआर के मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए। यदि मतदान का अधिकार छीन लिया जाता है, तो यह किसी भी पार्टी के लिए अच्छा नहीं है।’’

उन्होंने दिल्ली पुलिस के उन कर्मियों की भी आलोचना की, जो जूते पहनकर और सिर ढके बिना गुरुद्वारा बंगला साहिब में दाखिल हुए और वहां से प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाया। उन्होंने सिख समुदाय से प्रदर्शनकारियों का साथ देने की अपील की।

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की नेता आइशी घोष ने भी कहा कि पाबंदियों के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘जंतर-मंतर 2.0 जारी है। हम सड़कों पर हैं और सड़कों पर ही रहेंगे। हम संविधान का पालन करेंगे।’’

कॉजपा के नेता आशुतोष रांका ने कहा कि पिछले 72 घंटे में हुए घटनाक्रमों ने लोगों को आपातकाल की याद दिला दी है। उन्होंने रेलवे स्टेशन को बंद किए जाने और ट्रेनें रद्द किए जाने का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, ‘‘1975 में भी ट्रेनें बंद नहीं की गई थीं।’’ रंका ने आरोप लगाया कि मोदी और शाह ने निर्वाचन आयोग (ईसी) के खिलाफ आंदोलन को अपने खिलाफ लड़ाई में बदल दिया है।

रांका ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद उन्हें, दास और कॉजपा संस्थापक अभिजीत दीपके को विमान से ‘‘अगवा’’ कर लिया गया था।

उन्होंने कहा कि दीपके हिरासत में थे, तभी उनकी दादी का निधन हो गया। रांका ने आरोप लगाया कि इस खबर की जानकारी देते समय अधिकारियों ने असंवेदनशीलता दिखाई। रांका ने आरोप लगाया कि दीपके ने अपने माता-पिता को चिंता से बचाने के लिए अपने रिश्ते के भाई से बात करने का अनुरोध किया था, क्योंकि उनके माता-पिता हृदय रोगी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद, अधिकारियों ने दीपके को उनकी दादी के निधन की जानकारी देते समय उन्हें कैमरों और माइक्रोफोन से घेर लिया।

रांका ने कहा कि दीपके नहीं चाहते थे कि उनके निजी दुख को सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने दीपके के परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की। रांका ने बताया कि हिरासत से रिहा होने के बाद दीपके अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र स्थित अपने पैतृक गांव रवाना हो गए।

दिल्ली पुलिस ने रविवार को एक वीडियो जारी करके कॉजपा के इस दावे का खंडन किया कि दीपके को 10 अक्टूबर को हिरासत में रहने के दौरान उनकी दादी के निधन की जानकारी नहीं दी गई थी।

पुलिस ने कहा कि दीपके को संवेदनशीलता के साथ इस खबर की जानकारी दी गई थी और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उनके गृह नगर जाने में मदद की पेशकश भी की गई थी, लेकिन उन्होंने यह पेशकश ‘‘ठुकरा’’ दी थी।

रांका ने कहा, ‘‘जब तक ज्ञानेश इस्तीफा नहीं देते, यह प्रदर्शन नहीं रुकेगा। हमारे स्वयंसेवकों ने आज भी जंतर-मंतर तक मार्च किया।’’

कॉजपा की विधि टीम की प्रमुख रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी कार्यकर्ताओं के परिवारों को धमका रहे हैं और उनसे अपने बच्चों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए कह रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खुफिया ब्यूरो के कर्मी उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं पर लगाई गई पाबंदियों के आधार पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक नागरिक हूं। मुझे कहीं भी जाने का अधिकार है। आप मुझे अवैध रूप से हिरासत में कैसे रख सकते हैं?’’

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) के प्रतिनिधि विराज देवांग ने आरोप लगाया कि दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर रहे छात्र कार्यकर्ताओं को रास्ते में रोककर हिरासत में लिया गया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने कार्यकर्ताओं की एक सूची तैयार की है।

कॉजपा ने यूट्यूबर ध्रुव राठी को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने का मुद्दा भी उठाया। राठी ने रिहाई के बाद एक वीडियो में कहा था कि सादे कपड़ों में आए कर्मी उन्हें बिना किसी कानूनी वारंट के उनके घर से ले गए थे।

कॉजपा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ा, जिसमें मुंबई में उसके एक संयोजक के साथ हिरासत में दुर्व्यवहार भी शामिल है। संगठन ने कथित घटनाओं पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए इन आरोपों की जांच की मांग की।

कॉजपा ने कहा कि स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को डराने-धमकाने, यात्रा पर पाबंदियां लगाने और सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचने में बाधा डालने की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि शांतिपूर्ण सभा को रोकने की कोशिश की जा रही है।

कॉजपा ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया है और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

भाषा अमित रंजन

रंजन