नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने सोरायसिस, विटिलिगो, डर्मेटाइटिस और फंगल संक्रमण जैसी त्वचा संबंधी आम बीमारियों के इलाज के लिए आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी पद्धतियों में मानक उपचार दिशानिर्देश जारी किए हैं।
मंत्रालय ने यह कदम चिकित्सीय परिस्थितियों में इन दिशानिर्देशों की व्यावहारिक उपयोगिता का आकलन करने के लिए जमीनी स्तर पर उनका सत्यापन किए जाने के बाद उठाया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के आयुष प्रकोष्ठ द्वारा तैयार इन दिशानिर्देशों में योग को भी शामिल किया गया है। इनका उद्देश्य आयुष की विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों में उपचार की एकरूपता, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और साक्ष्यों पर आधारित चिकित्सकीय तौर-तरीकों को बढ़ावा देना है।
मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि इन दिशानिर्देशों का जमीनी स्तर पर परीक्षण आयुष प्रकोष्ठ ने दिल्ली सरकार के आयुष निदेशालय के सहयोग से किया। इसमें प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले चिकित्सा अधिकारियों को शामिल किया गया। उपचार संबंधी प्रोटोकॉल की व्यावहारिक उपयोगिता पर मिले सुझावों को अंतिम दस्तावेजों में शामिल किया गया है।
ग्यारहवें आयुर्वेद दिवस पर जारी इन दिशानिर्देशों में सोरायसिस, डर्मेटाइटिस, विटिलिगो, डर्मेटोफाइटोसिस जैसी बीमारियों की रोकथाम, निदान, उपचार के लिए विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के अनुरूप सुझाव दिए गए हैं। डर्मेटोफाइटोसिस फंगल संक्रमणों का एक समूह है, जो त्वचा, बालों और नाखूनों को प्रभावित करता है।
इन दिशानिर्देशों को तैयार करने की प्रक्रिया में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया। इनमें आयुष अनुसंधान परिषदों, आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी के वरिष्ठ शिक्षाविदों, योग विशेषज्ञों तथा आधुनिक चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञों ने योगदान दिया।
इस पहल के महत्व पर ज़ोर देते हुए, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि ये दिशानिर्देश त्वचा संबंधी आम बीमारियों के सुरक्षित, प्रभावी और समग्र उपचार में मदद के लिए विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के विशिष्ट उपचार तरीकों को आधुनिक वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ जोड़ते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मानकीकृत और साक्ष्यों पर आधारित चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देकर ये दिशानिर्देश मरीजों की देखभाल में सुधार लाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष चिकित्सा पद्धतियों की भूमिका को मजबूत करने में मदद करेंगे।’’
भाषा आशीष नेत्रपाल
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