Breaking News

एमएलसी चुनाव: मेरठ-बरेली में बीजेपी की जीत     |   भाजपा प्रत्याशी डॉ हरि सिंह ढिल्लों की बड़ी जीत, 17676 मतों से विजयी     |   इजरायल चुनाव: एग्जिट पोल में बेंजामिन नेतन्याहू को बहुमत नहीं     |   सूडान के दारफुर में बाजार पर ड्रोन हमला, 102 लोगों की मौत, सेना पर आरोप     |   बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन की चांदनी चौक इलाके में पदयात्रा आज     |  

एलन मस्क ने रिलायंस समर्थित कंपनियों की ओर से भाजपा को दिए चंदे की खबरों को साझा किया

वाशिंगटन, 10 अक्टूबर (भाषा) अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने शनिवार को भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी पर अपने तीखे हमले जारी रखते हुए मीडिया खबरों के स्क्रीनशॉट साझा किए। इन खबरों में आरोप लगाया गया था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा वित्तपोषित एक कंपनी ने सोशल मीडिया पर भाजपा के अभियानों को बढ़ावा देने में मदद की और रिलायंस से जुड़ी एक कंपनी ने सत्तारूढ़ दल को बड़ा राजनीतिक चंदा दिया।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर मस्क द्वारा साझा की गई ताजा पोस्ट में 2022 की अल जजीरा की एक खबर शामिल थी, जिसका शीर्षक था - 'रिलायंस द्वारा वित्तपोषित एक फर्म ने कैसे फेसबुक पर बीजेपी के अभियान को बढ़ावा दिया।' इसके साथ ही एक और पुरानी खबर साझा की गई, जिसमें बताया गया कि रिलायंस से जुड़ी एक कंपनी ने चुनावी बॉन्ड के माध्यम से भाजपा को 385 करोड़ रुपये और शिवसेना को 25 करोड़ रुपये का चंदा दिया था।

यह ताजा पोस्ट ऐसे समय आई है जब मस्क भारत में स्टारलिंक की उपग्रह ब्रॉडबैंड (सैटकॉम) सेवाओं की शुरुआत में लगातार हो रही देरी को लेकर मुकेश अंबानी की कड़ी आलोचना कर रहे हैं।

इससे कुछ ही घंटे पहले उन्होंने उद्योगपति मुकेश अंबानी को व्यंग्यात्मक लहजे में ‘‘प्रधानमंत्री अंबानी’’ कहकर संबोधित किया था और उन पर ‘‘एकाधिकार’’ बनाए रखने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।

साथ ही, उद्योगपति मस्क ने पूछा, ‘‘क्या अंबानी देश में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देने पर विचार करेंगे।’’

रिलायंस ने मस्क के इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि दूरसंचार और उपग्रह सेवाओं के लिए देश का आधिकारिक ढांचा ''निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण'' है तथा इसे चुनिंदा तरीके से लागू किए जाने की कोई भी बात ''निराधार और भ्रामक'' है।

संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया था कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता है।

उन्होंने कहा था कि एक ‘खास’ कंपनी को लेकर काफी चर्चा हो रही है, लेकिन देश में तीन कंपनियों को उपग्रह संचार (सैटकॉम) लाइसेंस मिल चुके हैं। इनमें से हरेक कंपनी को सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी करने के बाद ही सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिलेगी।

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय