(विजय जोशी)
तिरुवनंतपुरम, नौ अक्टूबर (भाषा) केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने एकतरफा फैसले लेने और सत्तारूढ़ यूडीएफ गठबंधन के संयोजक को दरकिनार करने के आरोपों पर शुक्रवार को पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने सभी फैसले कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की जानकारी और सहमति से लिए हैं।
अपनी इस टिप्पणी से उन्होंने सत्ता में आने के महज चार महीने के भीतर सत्तारूढ़ खेमे में मतभेद के संकेतों को खारिज दिया।
सतीशन ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के संयोजक अदूर प्रकाश की उस आलोचना का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि गठबंधन के सहयोगी दलों इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और फॉरवर्ड ब्लॉक को कैबिनेट स्तर के दो पद दिए जाने के समय उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई थी। प्रकाश ने सतीशन की कार्यशैली की भी आलोचना की थी।
सतीशन ने प्रकाश का नाम लिए बिना कहा, ‘‘समस्या यह है कि कोई कह रहा है कि मैं किसी से चर्चा नहीं कर रहा हूं।’’
हालांकि, साक्षात्कार में उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि कैबिनेट में केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष सनी जोसेफ, केपीसीसी के दो पूर्व अध्यक्ष, कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के एक सदस्य, कांग्रेस के दो प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष, युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और दो महिला नेता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये नेता विभिन्न क्षेत्रों के लगभग सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
सतीशन ने कहा, ‘‘हम पार्टी के नेताओं के साथ हर मुद्दे पर चर्चा करते हैं। नीतिगत मामलों पर मैं पार्टी से चर्चा करूंगा। प्रशासनिक मामलों पर पार्टी से चर्चा करने की जरूरत नहीं है, रोजमर्रा के कामकाज के मामलों पर भी पार्टी से चर्चा करने की जरूरत नहीं है। नीतिगत मामलों में पार्टी हमारा मार्गदर्शन करेगी। हम पार्टी की नीतियों को लागू कर रहे हैं।’’
उनसे पूछा गया था कि क्या कांग्रेस में आंतरिक राजनीतिक कलह पार्टी के लिए ‘‘अभिशाप’’ है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘कांग्रेस एक अलग पार्टी है। यह भाजपा जैसी नहीं है। मैं राज्य का मुख्यमंत्री हूं और पार्टी में कोई भी मुझसे असहमत हो सकता है। वे मेरी आलोचना भी कर सकते हैं और इनमें पार्टी में उभरते युवा भी शामिल हैं। मैं आलोचना से ऊपर नहीं हूं। अगर वे यह बताते हैं कि मैं गलत हूं, तो मैं उनकी बात सुनूंगा। अगर मुझे लगता है कि वे गलत हैं, तो मैं उन्हें समझाने की कोशिश करूंगा।’’
इस मुद्दे पर प्रकाश द्वारा विवाद खड़ा किए जाने के बाद सतीशन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है। प्रकाश ने इस मामले में शिकायत करने के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से भी मुलाकात की थी।
सतीशन की टिप्पणियों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार बनने के महज चार महीने के भीतर गठबंधन अपने पहले बड़े आंतरिक विवाद का सामना कर रहा है। मोर्चे के संयोजक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रकाश ने सतीशन के कामकाज के तरीके पर हाल में सवाल उठाए थे।
प्रकाश ने हाल में शिकायत की थी कि महत्वपूर्ण फैसले बिना चर्चा के किए जा रहे हैं, यूडीएफ की बैठकें नहीं हो रही हैं और अहम घटनाक्रम की जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिल रही है। इससे मुख्यमंत्री, कांग्रेस संगठन और गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच तालमेल में बढ़ती कमी का संकेत मिलता है।
प्रकाश ने हाल में यहां केपीसीसी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि काफी समय से यूडीएफ की बैठक नहीं हुई है और उन्होंने बैठक बुलाने की पहल नहीं करने के लिए सतीशन को जिम्मेदार ठहराया था। सतीशन मोर्चे के अध्यक्ष भी हैं।
प्रकाश ने कहा था कि पिछले कुछ दिनों से यूडीएफ की कोई बैठक नहीं हुई है और मोर्चे के अध्यक्ष होने के नाते मुख्यमंत्री को ही बैठक बुलाने की पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सतीशन की ओर से कोई सूचना नहीं मिलने के कारण वह यूडीएफ की अगली बैठक नहीं बुला पाए हैं।
शाम को एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए सतीशन ने कहा कि वह कांग्रेस के भीतर होने वाली आलोचनाओं के लिए तैयार हैं और यदि उनसे कोई गलती हुई है, तो वह उसमें सुधार करेंगे।
यूडीएफ में कुछ मुद्दों पर विचार-विमर्श की कमी होने संबंधी प्रकाश के आरोपों पर सवालों का जवाब देते हुए सतीशन ने कहा कि वह पार्टी के प्रति प्रतिबद्ध हैं और आंतरिक मामलों पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं करेंगे।
सतीशन ने कहा कि नीतिगत और रणनीतिक मुद्दों पर सरकार और पार्टी के साथ चर्चा की जाती है। उन्होंने कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और यूडीएफ के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने अपना पक्ष पार्टी नेतृत्व के सामने रखा है, सतीशन ने कहा, ‘‘किसी ने भी मुझसे स्पष्टीकरण नहीं मांगा है।’’
भाषा शफीक अविनाश
अविनाश