मुंबई, नौ अक्टूबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को बैंकों के लिए नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) की अनिवार्य राशि का दैनिक आधार पर कम-से-कम 99 प्रतिशत बनाए रखना जरूरी कर दिया। फिलहाल यह सीमा 90 प्रतिशत है।
आरबीआई ने एक बयान में कहा कि नया नियम 16 अक्टूबर, 2026 से लागू होगा।
केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग प्रणाली में नकदी की मौजूदा स्थिति की समीक्षा के बाद यह फैसला किया है।
वर्तमान में अनुसूचित बैंकों को पखवाड़े के प्रत्येक दिन अनिवार्य सीआरआर का कम-से-कम 90 प्रतिशत बनाए रखना होता है। हालांकि, पूरे पखवाड़े के दौरान दैनिक आधार पर बनाए गए सीआरआर का औसत आरबीआई द्वारा निर्धारित अनिवार्य अनुपात से कम नहीं होना चाहिए।
सीआरआर वह न्यूनतम राशि है, जो बैंकों को अपनी कुल जमा राशि के एक निश्चित प्रतिशत के रूप में आरबीआई के पास नकद रखनी होती है। दैनिक आधार पर इसकी अनिवार्य सीमा बढ़ने से बैंकों के पास उपलब्ध नकदी के प्रबंधन पर असर पड़ेगा।
आठ अक्टूबर तक बैंकिंग प्रणाली में करीब 3.88 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी थी। आरबीआई पिछले दो महीनों से इस अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामी सहित कई उपाय कर रहा है।
इस सप्ताह की शुरुआत में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक अतिरिक्त नकदी की स्थिति समाप्त हो जाएगी। हालांकि, उन्होंने सीआरआर बढ़ाने को सबसे कम पसंदीदा विकल्प बताया था।
बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त नकदी मुख्य रूप से बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर (बी) जमा जुटाने से आई। इन जमाओं से विदेशी मुद्रा प्रणाली में आई, जबकि बाद में आरबीआई के साथ किए गए स्वैप से बैंकों को रुपये की नकदी मिली।
इसके अलावा, महीने के अंत में वेतन और पेंशन के भुगतान सहित सरकार के खर्च से भी बैंकिंग प्रणाली में नकदी बढ़ी।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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