नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) संसदीय समिति ने प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रश्न बैंक तैयार करने में निवेश करने, परीक्षा के बहुत करीब इसे तैयार करने तथा प्रश्न बैंक बनाने और अनुवाद का काम सौंपने के लिए आईआईटी, आईआईएम और एम्स के विशेषज्ञों की सेवाएं लेने जैसे उपाय सुझाए हैं।
राज्यसभा सदस्य मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति को ‘राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार और उसे मजबूत बनाने’ पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।
यह रिपोर्ट नीट प्रश्नपत्र लीक होने और एनटीए में प्रशासनिक खामियों को लेकर उठे विवाद के बाद आई है। इस विवाद के कारण देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए थे और अंततः तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।
समिति ने कहा कि दीर्घकाल में प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रश्न बैंकों में निवेश करना सबसे व्यावहारिक उपाय है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘प्रश्नों के एक ही सेट का बार-बार इस्तेमाल करना या हर साल परीक्षकों से नए प्रश्नपत्र तैयार कराने की व्यवस्था परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। इसलिए, समिति का मानना है कि एनटीए को एक बड़ा, विविधतापूर्ण और लगातार अद्यतन होने वाला प्रश्न बैंक तैयार करने में निवेश करना चाहिए। इससे प्रश्नपत्र तैयार करने वालों को पहले से जानकारी दिए बिना प्रश्नपत्र बनाए जा सकेंगे।’’
केंद्र ने घोषणा की थी कि अगले साल से मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी’ पारंपरिक माध्यम के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) के रूप में आयोजित की जाएगी।
समिति ने कहा, ‘‘सीबीटी में प्रश्नपत्रों को छापने और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की जरूरत नहीं होती। इसलिए, प्रश्नपत्र बहुत पहले तैयार करने की कोई बाध्यता नहीं है।’’
समिति ने कहा, ‘‘इसलिए, अंतिम प्रश्नपत्र परीक्षा के बिल्कुल करीब तैयार किए जाने चाहिए। इसके लिए डिजिटल माध्यमों से प्रश्न बैंक से सवाल चुने जाएं और विशेषज्ञों से उनकी जांच कराई जाए।’’
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘एनटीए को प्रश्न बैंक तैयार करने और अनुवाद के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) जैसे देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के विश्वसनीय विशेषज्ञों की सेवाएं लेनी चाहिए।’’
समिति ने कहा, ‘‘एनटीए को इन विशेषज्ञों की नियुक्ति से पहले उनकी विश्वसनीयता सुनिश्चित करने और हितों के टकराव की किसी भी आशंका को दूर करने के लिए उनके पिछले रिकॉर्ड की जांच करने की व्यवस्था भी विकसित करनी चाहिए। इसमें यह जांच भी शामिल होनी चाहिए कि कहीं वे निजी कोचिंग सेंटर के मालिक या शिक्षक तो नहीं हैं अथवा उनके परिवार का कोई सदस्य परीक्षा तो नहीं दे रहा है।’’
भाषा आशीष माधव
माधव