कोलकाता, नौ अक्टूबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज की। पार्टी ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नंदीग्राम में रिकॉर्ड मतों के अंतर से अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराया, जबकि मुस्लिम बहुल रेजीनगर में अप्रत्याशित जीत हासिल की।
इसके साथ ही राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत करने के करीब पांच महीने बाद भाजपा ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली।
इन नतीजों से पश्चिम बंगाल के बदलते चुनावी परिदृश्य के दो अलग-अलग, लेकिन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पहलू सामने आए। पहला, राज्य के राजनीतिक इतिहास में अहम स्थान रखने वाले नंदीग्राम में भाजपा की स्थिति मजबूत होना और दूसरा, रेजीनगर में पार्टी की अप्रत्याशित सफलता जहां चुनावी मुकाबलों में अल्पसंख्यक मतदाताओं की भूमिका पारंपरिक रूप से महत्वपूर्ण रही है।
जीत का बड़ा अंतर विपक्ष की बिखरी हुई स्थिति की कमजोरियों को भी उजागर करता है। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवारों को छोड़कर बाकी सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, नंदीग्राम में भाजपा उम्मीदवार हसिरानी रथ ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को रिकॉर्ड 1,22,753 मतों के अंतर से हराया। हसिरानी रथ, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक रहे चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जिनकी हत्या कर दी गई थी।
हसिरानी रथ को 1,64,427 वोट मिले, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थन वाले प्रधान को 41,674 मत प्राप्त हुए। भाकपा उम्मीदवार शांति गोपाल गिरि 5,779 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। जीत का यह अंतर 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से शुभेंदु की 9,665 मतों की जीत से कहीं अधिक है। बाद में, शुभेंदु ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी, जिसके कारण नंदीग्राम में उपचुनाव कराना पड़ा।
हसिरानी रथ की उम्मीदवारी से भावनात्मक पहलू भी जुड़ा था। उनके बेटे चंद्रनाथ रथ की छह मई को कोलकाता के बाहरी इलाके मध्यमग्राम में हत्या कर दी गई थी। यह घटना विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के महज दो दिन बाद हुई थी।
वर्ष 2011 में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के बाद टीएमसी के सत्ता में आने और वाम मोर्चे के 34 साल के शासन का अंत होने के बाद से नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्र में रहा है। इसके बाद 2021 में यह निर्वाचन क्षेत्र राज्य के सबसे महत्वपूर्ण चुनावी मुकाबलों में से एक का गवाह बना, जब शुभेंदु ने ममता बनर्जी को हराया था।
भाजपा की जीत से सत्तारूढ़ दल को ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करने का अवसर मिला है, जो शुभेंदु की राजनीतिक यात्रा से गहराई से जुड़ा रहा है।
नंदीग्राम में विपक्ष की रणनीति पर भी सवाल उठे। ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार संचित प्रधान डे ने शुभेंदु से मुलाकात के बाद चुनावी मुकाबले से अपना नाम वापस ले लिया था। इसके बाद बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रधान का समर्थन किया। इसे भाजपा विरोधी मतों के बंटवारे को रोकने की कोशिश के रूप में देखा गया। हालांकि, कांग्रेस उम्मीदवार हसिरानी रथ से काफी पीछे रह गए।
भाजपा ने मुर्शिदाबाद जिले के मुस्लिम बहुल रेजीनगर निर्वाचन क्षेत्र में भी बड़ी सफलता हासिल की। यहां पार्टी के उम्मीदवार शंकरव सरकार ने आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के प्रत्याशी गुलाम नबी आजाद को 75,816 मतों से हराया।
शंकरव सरकार को 1,29,914 वोट मिले, जबकि आजाद को 54,098 मत प्राप्त हुए। इस तरह भाजपा उम्मीदवार को करीब 63.14 प्रतिशत वोट मिले, जबकि एजेयूपी उम्मीदवार को 26.29 प्रतिशत मत प्राप्त हुए।
कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुल्लाहिल काफ़ी को 6,168 वोट मिले। वह ममता टीएमसी के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी से मामूली अंतर से आगे रहे, जिन्हें 3,847 मत प्राप्त हुए, जबकि अलग हुए धड़े डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (डीटीएमसी) के सफीउज्जमां शेख को 2,044 मत प्राप्त हुए। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को 3,797 वोट मिले।
अब, राज्य की 294 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा के 209 विधायक हैं।
रेजीनगर में भाजपा की वोट हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत और नंदीग्राम में 50 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत हो गया, जो दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावी समीकरण में बड़े बदलाव का संकेत है।
मुख्यमंत्री ने नतीजों को इस बात के सबूत के तौर पर देखा कि भाजपा को अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच स्वीकार्यता मिल रही है।
रेजीनगर में करीब 70 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम हैं। यहां पारंपरिक रूप से टीएमसी, कांग्रेस और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला होता रहा है।
भाजपा की यह जीत 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों से बिल्कुल अलग रही। उस चुनाव में एजेयूपी के संस्थापक हुमायूं कबीर ने रेजीनगर सीट 58,000 से अधिक मतों के अंतर से जीती थी। उन्होंने नवादा सीट पर भी जीत हासिल की थी। उनके बेटे गुलाम नबी आजाद ने रेजीनगर सीट खाली होने के बाद उपचुनाव लड़ा। कबीर ने नवादा सीट अपने पास रखी थी।
टीएमसी के पूर्व नेता कबीर को मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद बनाने के प्रस्ताव पर विवाद के बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने एजेयूपी की स्थापना की, जिससे इस निर्वाचन क्षेत्र का राजनीतिक मुकाबला बदल गया।
रेजीनगर में भाजपा के प्रदर्शन ने निर्वाचन क्षेत्र के चुनावी समीकरणों पर नए सिरे से ध्यान आकर्षित किया है। विपक्ष के बंटे होने से भाजपा को फायदा मिला हो सकता है, हालांकि केवल नतीजों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किस समुदाय ने किसे वोट दिया या भाजपा की जीत के पीछे क्या कारण रहे।
टीएमसी के बागी धड़े की चुनावी हार ने अलग पहचान के तहत पार्टी की राजनीतिक विरासत पर अपना दावा स्थापित करने की उसकी संभावनाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में उसके उम्मीदवार भाजपा से काफी पीछे रहे, जिससे उसके स्वतंत्र जनाधार के व्यापक होने के बहुत कम संकेत मिले।
इस बीच, माकपा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने रेजीनगर और नंदीग्राम उपचुनावों में ‘‘वोट की लूट’’ के जरिए जीत हासिल की है।
भाषा नेत्रपाल नरेश
नरेश