नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2017 में पश्चिमी दिल्ली में एक व्यक्ति को गोली मारे जाने के मामले में तीन आरोपियों को बरी कर दिया है।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी घटनास्थल पर मौजूद थे या अपराध में शामिल थे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पूजा तलवार तीन लोगों (मोहम्मद गुड्डू, राम उर्फ विक्की और लखन महावर उर्फ गोलू) के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रही थीं। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपना मामला संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
छह अक्टूबर के आदेश में अदालत ने कहा, ‘मेरी सुविचारित राय में अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि आरोपी घटनास्थल पर मौजूद थे या उन्होंने कथित अपराध किया था।’’
अभियोजन पक्ष के अनुसार, समीर खान पर 22 जून, 2017 को सुभाष नगर में नगर निगम (एमसीडी) कार्यालय के पास हमला किया गया था। उन्होंने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा था कि गुड्डू को उसके पुलिस मुखबिर होने का संदेह है। इसी कारण आरोपियों ने उसकी पिटाई की और गुड्डू ने उसे गोली मार दी। इस संबंध में राजौरी गार्डन थाने में मामला दर्ज किया गया था।
गुड्डू और राम पर हत्या के प्रयास तथा साझा मंशा के तहत अपराध करने के आरोप लगाए गए थे। गुड्डू पर शस्त्र अधिनियम के तहत भी आरोप लगाया गया था।
वर्ष 2025 में गिरफ्तार किए गए लखन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। उस पर घोषित अपराधी होने के बावजूद अदालत में पेश नहीं होने का आरोप था।
हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता और अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाह समीर खान ने अभियोजन के मामले का समर्थन नहीं किया।
समीर ने शिकायत पर अपने अंगूठे का निशान होने की बात स्वीकार की, लेकिन उसमें लिखी बातों से इनकार करते हुए कहा कि उसने हमलावरों के चेहरे नहीं देखे थे।
भाषा संतोष माधव
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