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न्यायालय ने केरल के ‘सबसे लंबे’ हाथी रमन की चिकित्सा रिपोर्ट मांगी

नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केरल सरकार को राज्य के सबसे लंबे हाथी बताए जाने वाले रमन को अपने संरक्षण में लेने के आदेश का पालन नहीं करने पर फटकार लगाई और हाथी की चिकित्सा रिपोर्ट मांगी।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता एवं न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ को बताया गया कि हाथी अभी देखभाल करने वाले व्यक्ति के संरक्षण में है, क्योंकि वह ‘मद’ की अवस्था में है और उसे दूसरी जगह नहीं ले जाया जा सकता।

‘मद’ हाथियों में होने वाली एक जैविक अवस्था है, जिसके दौरान उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर काफी बढ़ जाता है।

हाथी की देखभाल करने वाले व्यक्ति ने शीर्ष अदालत को बताया कि हाथी की देखभाल प्यार और स्नेह से की गई है।

इस पर न्यायमूर्ति दत्ता ने टिप्पणी की, “प्यार, देखभाल और वह भी शीर्ष अदालत के रोक संबंधी आदेशों का उल्लंघन कर पैसा कमाने के लिए। हम अच्छी तरह समझते हैं कि प्यार और स्नेह क्या होता है। हम आपकी बात नहीं सुनने वाले हैं।”

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता से हाथी की हालिया स्वास्थ्य रिपोर्ट के बारे में भी पूछा।

पीठ ने कहा, “क्या आप हाथी की स्थिति पर नजर रख रहे हैं, या नहीं? पिछली चिकित्सा रिपोर्ट का मतलब है कि आपने 24 जून के बाद उसकी जांच नहीं की है?”

शीर्ष अदालत ने इसके बाद राज्य सरकार को हाथी की स्थिति से संबंधित हालिया चिकित्सा रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा, “अगली सुनवाई की तारीख पर राज्य सरकार हाथी की देखभाल के संबंध में नौ जून, 2026 के अदालत के आदेश का पूरी ईमानदारी से पालन करे।”

शीर्ष अदालत ने नौ जून को यह कहते हुए केरल सरकार को हाथी रमन को अपने कब्जे में लेने और उसे किसी उपयुक्त पुनर्वास केंद्र में रखने का निर्देश दिया था कि बेजुबान जानवरों का कल्याण सर्वोपरि महत्व रखता है।

अदालत ने कहा था कि रमन का व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है और उसे धार्मिक समारोहों तथा जुलूसों में शामिल किया जा रहा है।

यह आदेश जयकृष्ण मेनन की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया था। मेनन ने दावा किया था कि हाथी माता अमृतानंदमयी मठ का है और उसकी देखभाल तथा रखरखाव के लिए उसे अस्थायी रूप से कृष्णनकुट्टी नामक व्यक्ति को सौंपा गया था।

पीठ ने कहा था, “यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है कि केरल राज्य के सबसे लंबे हाथी रमन को व्यावसायिक शोषण पर रोक लगाने वाले आदेश के बावजूद व्यावसायिक इस्तेमाल का शिकार बनाया गया। ऐसा भी इस अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासन के आधार पर हुआ।”

शीर्ष अदालत ने विवादित वसीयत के आधार पर हाथी को अपने कब्जे में रखने वाले कृष्णनकुट्टी को अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासन का जानबूझकर उल्लंघन करने के लिए अवमानना का दोषी पाया था और उस पर 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया था।

भाषा रंजन नरेश

नरेश