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पहली छमाही में राज्यों की कुल उधारी में दोबारा जारी बॉन्ड की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत रही

मुंबई, नौ अक्टूबर (भाषा) राज्य सरकारों ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 'राज्य विकास ऋण' (एसडीएल) के जरिये 4.98 लाख करोड़ रुपये जुटाए। इसमें से 3.28 लाख करोड़ रुपये पहले जारी किए जा चुके बॉन्ड को दोबारा जारी करके जुटाए गए, जो कुल उधारी का 65.94 प्रतिशत है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के संकलन से पता चला कि राज्यों की कुल उधारी में बॉन्ड को फिर से जारी करने की हिस्सेदारी पिछले वित्त वर्षों की तुलना में तेजी से बढ़ी है। पीटीआई-भाषा ने आरबीआई के आंकड़ों का संकलन किया।

वित्त वर्ष 2025-26 में कुल बॉन्ड निर्गम में पुनर्निर्गम की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत थी। यह वित्त वर्ष 2019-20 के 17.29 प्रतिशत से अधिक और पिछले सात वित्त वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर था। वित्त वर्ष 2024-25 में इसकी हिस्सेदारी 12.2 प्रतिशत, 2023-24 में 5.73 प्रतिशत, 2022-23 में 7.77 प्रतिशत, 2021-22 में 10.4 प्रतिशत और 2020-21 में 9.72 प्रतिशत थी।

पुनर्निर्गम के तहत पहले जारी किए गए बॉन्ड की उसी श्रृंखला को दोबारा बाजार में पेश किया जाता है, न कि नई परिपक्वता अवधि या ब्याज दर वाली नई प्रतिभूति जारी की जाती है। इससे एक तरह की प्रतिभूतियों में कारोबार बढ़ाने और बाजार में नकदी स्थिति सुधारने में मदद मिल सकती है।

आरबीआई राज्यों को मानक बांड निर्गम रणनीति अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इसके तहत राज्य सरकारें पहले से घोषित उधारी कैलेंडर के अनुरूप तय परिपक्वता अवधि वाले बॉन्ड जारी करती हैं। इससे निवेशकों को संभावित निर्गम का अनुमान लगाने और द्वितीयक बाजार में कारोबार बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि राज्यों की सहमति के आधार पर वित्त वर्ष 2026-27 से नौ राज्य सरकारों के लिए इस रणनीति को प्रायोगिक आधार पर शुरू किया गया है।

इक्रा की एक रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 24 राज्यों ने राज्य सरकारी प्रतिभूतियों को दोबारा जारी किया, जबकि वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 की इसी अवधि में ऐसे राज्यों की संख्या चार से नौ के बीच थी।

रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, बॉन्ड पुनर्निर्गम आने वाले महीनों में राज्यों के लिए उधारी जुटाने का सामान्य तरीका बन सकता है।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के एजेंडे में शेष राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भी मानक निर्गम रणनीति अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने को प्राथमिकता दी है।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण