नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को सरकार से राष्ट्रीय राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर के अलावा किसी अन्य स्थान को निर्धारित करने पर विचार करने को कहा।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) और कुछ छात्र संगठनों की ओर से आहूत प्रदर्शन के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी आने वाली ट्रेनों को रद्द करने और मेट्रो स्टेशनों पर प्रस्तावित प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने प्रदर्शनकारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं से युक्त स्थान की जरूरत पर जोर दिया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह टिप्पणी तब की, जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर के अलावा किसी अन्य स्थान की पहचान करने पर विचार करेगा।
सॉलिसिटर जनरल ने पीठ से इस बात को अपने आदेश में दर्ज करने का अनुरोध किया और बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल भी इस सुझाव पर सहमत हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘सुनवाई के दौरान यह सुझाव भी दिया गया और सभी पक्षों के वरिष्ठ वकील/वकील इस बात पर सहमत हैं कि अब समय आ गया है कि शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से विरोध करने वालों के लिए ऐसी उपयुक्त जगह की पहचान की जाए और उसे तय किया जाए, जहां सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। संबंधित अधिकारी इस सुझाव पर विचार करें और उचित निर्णय लें।’’
सुनवाई के दौरान पीठ को बताया गया कि पुलिस ने निर्धारित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए कॉजपा और भारतीय युवा कांग्रेस को अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
पीठ को बताया गया कि रामलीला मैदान में प्रदर्शन करने की संभावना पर भी विचार नहीं किया गया। अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यदि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया जा रहा था, तो अधिकारी प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान में एकत्र होने की अनुमति दे सकते थे।
हालांकि, प्रधान न्यायाधीश ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित करने से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि इस इलाके में सरकारी आवास और कुछ सांसदों के घर भी स्थित हैं।
उन्होंने प्रदर्शनकारियों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘वहां सरकारी आवास हैं। कुछ सांसद सामने वाली सड़क पर रहते हैं। प्रदर्शनकारियों को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें वहां शौचालय तक की सुविधा नहीं है।’’
सॉलिसिटर जनरल ने भी प्रदर्शन स्थल पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में आने वाली कठिनाइयों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रदर्शनकारी बीमार पड़ जाता है, तो एंबुलेंस को उस स्थान तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है।
आदेश सुनाए जाने के बाद सॉलिसिटर जनरल ने फिर दोहराया कि केंद्र सरकार प्रदर्शन के लिए किसी वैकल्पिक स्थल को निर्धारित करने के संबंध में फैसला लेने पर विचार करेगी।
इसके बाद पीठ ने इस सुझाव पर विचार करने और उचित निर्णय लेने का मामला सक्षम प्राधिकारी पर छोड़ दिया।
भाषा आशीष नरेश
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