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अदालत ने हिरासत के खिलाफ कार्यकर्ता की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया

नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को नागरिक अधिकार कार्यकर्ता मोहम्मद वासिक नदीम खान की उस याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस ने उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लिया था।

खान की ओर से पेश वकील ने अदालत से याचिका पर शुक्रवार को ही सुनवाई करने का अनुरोध करते हुए आशंका जताई कि खान को दोबारा हिरासत में लेकर नजरबंद किया जा सकता है, जबकि उन्हें शुक्रवार को कोलकाता जाने के लिए विमान पकड़ना है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और कहा कि इस पर 12 अक्टूबर को सुनवाई होगी।

वकील ने कहा कि यह मामला अत्यावश्यक है और इसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सवाल जुड़ा है। उन्होंने कहा कि खान को मौखिक रूप से सूचना मिली है, जिसके बाद उन्हें आशंका है कि शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी में होने वाले प्रदर्शनों से पहले दिल्ली पुलिस उन्हें फिर से हिरासत में ले सकती है।

वकील ने दावा किया कि खान किसी भी तरह से प्रदर्शन में शामिल नहीं हो रहे और उन्होंने शुक्रवार को कोलकाता जाने के लिए पहले ही टिकट बुक करा रखा है।

उन्होंने कहा कि खान को पहले भी नजरबंद किया गया था और वह मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने के खिलाफ संरक्षण का अनुरोध कर रहे हैं। वकील ने कहा कि यदि याचिका पर आज सुनवाई नहीं हुई, तो इसका कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।

हालांकि, पीठ ने शुक्रवार को मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया और कहा, ‘‘आपको यात्रा करने से किसने रोका है? ऐसा कोई लिखित संदेश नहीं है कि आपको यात्रा नहीं करनी चाहिए या आपको नजरबंद किया जाएगा। आप किसी फोन के आधार पर कह रहे हैं कि हमें कोई आदेश पारित करना चाहिए। माफ कीजिए, हम आपकी बात सुनेंगे, लेकिन आज नहीं, सोमवार को।’’

एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) के राष्ट्रीय सचिव और ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट’ पहल के संस्थापक खान ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए शाहीन बाग थाने से जुड़े पुलिसकर्मियों ने 29 सितंबर को सुबह करीब साढ़े नौ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक उन्हें अबुल फजल एन्क्लेव स्थित जमात-ए-इस्लामी हिंद के मुख्यालय में बंद रखा था।

एपीसीआर और ‘मॉनिटरिंग कमेटी ऑफ इंडियन मुस्लिम’ ने अन्य नागरिक संस्थाओं के साथ मिलकर उपासना स्थलों पर बार-बार हो रहे हमलों के विरोध में 29 सितंबर को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया था।

खान ने नयी दिल्ली जिले में सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाने वाले आदेश को भी चुनौती दी है। खान ने 29 सितंबर को उन्हें कथित तौर पर नजरबंद किए जाने को अवैध और असंवैधानिक घोषित करने तथा उनके मौलिक अधिकारों के कथित उल्लंघन के लिए मुआवजा देने का अनुरोध किया है।

भाषा आशीष अविनाश

अविनाश