नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) वाम दलों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और निर्वाचन आयोग के कामकाज के खिलाफ 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले लगाई गई पाबंदियों की शुक्रवार को निंदा की और इसे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के नागरिकों के मौलिक अधिकार पर हमला करार दिया।
वाम दलों ने एक संयुक्त बयान जारी कर दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार से संभावित प्रदर्शनकारियों को डराना-धमकाना बंद करने तथा उन्हें प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर जाने की अनुमति देने की मांग की।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (एआईएफबी) ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देश पर लगाई गई पाबंदियों का उद्देश्य प्रस्तावित जुटान को रोकना और सीमित करना है।
उन्होंने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने, बड़े पैमाने पर बैरिकेडिंग किए जाने, निषेधाज्ञा लागू करने, 57 मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने, दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द किए जाने और देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों को कथित तौर पर घरों में नजरबंद किए जाने का जिक्र किया।
बयान में कहा गया, ''ऐसी खबरें हैं कि विभिन्न स्थानों पर छात्रों को हिरासत में लिया जा रहा है और छात्र संगठनों के कार्यालयों की निगरानी की जा रही है।''
वाम दलों ने कहा कि इन पाबंदियों के कारण आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा, ''हम दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि वे संभावित प्रदर्शनकारियों को डराना-धमकाना और परेशान करना बंद करें तथा लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लेने से बचें।''
वाम दलों ने अधिकारियों से प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने और उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने की मांग की।
संयुक्त बयान पर माकपा महासचिव एम ए बेबी, भाकपा महासचिव डी राजा, भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, एआईएफबी महासचिव जी देवराजन और आरएसपी महासचिव मनोज भट्टाचार्य ने हस्ताक्षर किए।
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