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एनआईटीआरए का बैटरी भंडारण की जरूरतें पूरी करने के लिए विविध प्रौद्योगिकियां अपनाने का आग्रह

नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) उद्योग संगठन नेट जीरो एनर्जी ट्रांजिशन एसोसिएशन (एनआईटीआरए) ने ऊर्जा सुरक्षा की तात्कालिक और दीर्घकालिक चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार से विभिन्न प्रकार की बैटरी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने वाली रणनीति अपनाने का आग्रह किया है।

संगठन ने बयान में कहा कि उसने सरकार को सुझाव दिए हैं कि बड़े पैमाने पर बिजली ग्रिड में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों की तैनाती और सरकारी खरीद में घरेलू स्तर पर निर्मित बैटरी सेल तथा वैकल्पिक प्रौद्योगिकियों के लिए एक निश्चित हिस्सा निर्धारित किया जाना चाहिए।

एनआईटीआरए ने कहा कि लिथियम-आयन बैटरियों के साथ सोडियम-आयन, फ्लो, जस्ता-आधारित और लौह-आधारित बैटरी प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान, विकास और विनिर्माण को लगातार समर्थन देना जरूरी है।

संगठन के मुताबिक, प्रमुख कच्चे माल और कलपुर्जों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना तथा बौद्धिक संपदा और कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना भी भारत के ऊर्जा बदलाव को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए अहम है।

बयान के अनुसार, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने वित्त वर्ष 2031-32 तक देश में करीब 411 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1000 मेगावाट) (जीडब्ल्यूएच) ऊर्जा भंडारण क्षमता की जरूरत का अनुमान लगाया है।

इन प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए एनआईटीआरए 24 अक्टूबर, 2026 को नयी दिल्ली में ‘बियॉन्ड लिथियम समिट 2026’ आयोजित करेगा। इसका विषय ‘भारत के बहु-प्रौद्योगिकी बैटरी भंडारण भविष्य का निर्माण’ है।

संगठन ने कहा कि यह देश में लिथियम-आयन से इतर बैटरी प्रौद्योगिकियों का तंत्र विकसित करने और मजबूत करने के लिए एक विशेष मंच है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों की 100 से अधिक कंपनियों के शामिल होने की उम्मीद है।

एनआईटीआरए के कार्यकारी निदेशक देबी प्रसाद दास ने कहा, ‘‘ सोडियम-आयन बैटरियां स्थिर ऊर्जा भंडारण के लिए निकट भविष्य में एक आशाजनक विकल्प हैं। इनके फायदे में कच्चे माल की उपलब्धता, सुरक्षा, विभिन्न तापमानों में काम करने की क्षमता और संभावित रूप से प्रतिस्पर्धी लागत शामिल हैं।’’

उन्होंने कहा कि दुनियाभर में सोडियम-आयन बैटरी सेल की विनिर्माण क्षमता हाल में 10 गीगावाट-घंटा से अधिक हो गई है और 2030 तक इसके 400 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।

इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स (एआरसीआई) के निदेशक आर. विजय ने कहा कि सोडियम-आयन बैटरी प्रौद्योगिकी भारत की भविष्य की ऊर्जा भंडारण जरूरतों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभर रही है।

भाषा योगेश निहारिका

निहारिका