मुंबई, नौ अक्टूबर (भाषा) मुंबई पुलिस ने फोन कॉल और मोबाइल उपभोक्ताओं का ब्योरा तथा उनकी मौजूदा ‘लोकेशन’ की जानकारी अवैध रूप से हासिल कर दूसरों को मुहैया कराने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो पुलिसकर्मियों समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
अधिकारियों ने बताया कि यह गिरोह महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार में सक्रिय था।
उन्होंने शुक्रवार को बताया कि गिरफ्तार किए गए दोनों पुलिसकर्मियों में से एक झारखंड पुलिस और दूसरा बिहार पुलिस में कांस्टेबल है।
मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के अनुसार, एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद इस गिरोह का खुलासा हुआ। आरोपी ‘‘चोरी हुए या खोए हुए मोबाइल फोन का पता लगाने’’ की सेवा देने का इंस्टाग्राम पर एक अकाउंट के जरिए प्रचार करता था।
जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपी विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने वाले लोगों को बताता था कि वह ‘‘इंस्पेक्टर संजय’’ नाम का पुलिस अधिकारी है और वह उनके खोए हुए मोबाइल फोन का पता लगाने के बहाने उनसे पैसे ऐंठता था।
अपराध खुफिया इकाई की टीम ने एक सूचना के आधार पर मुख्य आरोपी को जोगेश्वरी (पश्चिम) इलाके से गिरफ्तार किया। उसके दो मोबाइल फोन की जांच में पता चला कि वह खोए हुए फोन का पता लगाने और अपनी सेवाओं के बारे में किए गए दावों को सही साबित करने के लिए अपने सहयोगियों से मोबाइल उपभोक्ताओं का विवरण (एसडीआर), लोकेशन संबंधी जानकारी और कॉल का ब्योरा (सीडीआर) अवैध रूप से हासिल करता था।
अपराध शाखा की आगे की जांच में इस तरह का डेटा मुहैया कराने वाले गिरोह से जुड़े नौ लोगों की पहचान हुई। इसके बाद महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार से पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। इनमें झारखंड और बिहार पुलिस में कार्यरत दो कांस्टेबल भी शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच से पता चला है कि गिरोह ने लगभग 50 कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), 520 से अधिक उपभोक्ता विवरण रिकॉर्ड (एसडीआर), 550 से अधिक मोबाइल नंबर की लोकेशन संबंधी जानकारी और 420 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान (आईएमईआई) नंबर से जुड़ी जानकारी मुहैया कराई थी।
इस मामले में सात मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।
अधिकारी ने बताया कि ओशिवारा थाने में मामला दर्ज किया गया है। फरार आरोपियों को पकड़ने और डेटा की इस अवैध आपूर्ति के पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
भाषा सिम्मी माधव
माधव