बेंगलुरु, नौ अक्टूबर (भाषा) कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने शुक्रवार को कहा कि जमीनी सत्यापन के बाद राज्य में सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सूची में आठ से 10 और तालुकों या संभवतः इससे अधिक को शामिल किया जा सकता है।
परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से सहायता मांगने के लिए अंतिम ज्ञापन तैयार कर रही है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि राज्य सरकार अब तक 217 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित कर चुकी है। उन्होंने कहा कि वहीं, 23 अन्य तालुकों में यह आकलन करने के लिए जमीनी सत्यापन किया जा रहा है कि क्या वे निर्धारित मानदंडों को पूरा करते हैं।
परमेश्वर ने कहा, “जमीनी सत्यापन की रिपोर्ट आज या कल तक आने की उम्मीद है। मुझे मिली जानकारी के अनुसार, आठ से 10 और तालुक या संभवतः 10 से अधिक तालुक इसके पात्र हो सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि अंतिम ज्ञापन तैयार करने से पहले सरकार नुकसान का आकलन करेगी और केंद्र के दिशानिर्देशों के अनुरूप यह गणना करेगी कि कितनी सहायता मांगी जा सकती है।
मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने राज्य के लिए राहत की मांग को लेकर प्रधानमंत्री, कृषि मंत्री और आपदा प्रबंधन का प्रभार संभाल रहे केंद्रीय गृहमंत्री से मुलाकात करने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली ले जाने का प्रस्ताव दिया है।
परमेश्वर ने कहा, “हम सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ले जाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने भी यही कहा है। हम इस संकट की स्थिति में राज्य को सहायता देने का अनुरोध करने के लिए केंद्र के समक्ष व्यक्तिगत रूप से अपनी बात रखेंगे।”
उन्होंने कहा कि ज्ञापन में नुकसान के आकलन और मांगी जाने वाली सहायता का विवरण होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र इस पर विचार करने के बाद राहत देने के संबंध में फैसला करेगा।
विपक्षी दलों के नेताओं के प्रस्तावित प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं होने संबंधी खबरों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकार उनसे इसमें भाग लेने की अपील करेगी। उन्होंने कहा कि यदि वे इनकार करते हैं, तो सरकार अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली जाएगी।
मुख्यमंत्री और कुछ मंत्रियों को निशाना बनाकर कथित स्टिंग ऑपरेशन किए जाने की खबरों पर परमेश्वर ने कहा कि उन्हें इस मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री के पास खुफिया जानकारी है और उन्हें कुछ सूचना मिली होगी, इसीलिए उन्होंने यह बयान दिया। हमारे स्तर पर इस बात का ब्योरा नहीं है कि इसे किसने अंजाम दिया या वास्तव में क्या हुआ।”
यह पूछे जाने पर कि क्या मामले की जांच के आदेश दिए जाने चाहिए, उन्होंने कहा कि इस बारे में फैसला मुख्यमंत्री को करना है, क्योंकि संबंधित जानकारी उन्हीं के पास है।
परमेश्वर ने इस आरोप को खारिज कर दिया कि सूखे की स्थिति सहित जनता से जुड़े अहम मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस मामले को उठाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “हमने किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे की अनदेखी नहीं की है। जैसे ही हमें सूखे की स्थिति पैदा होने का अहसास हुआ, हमने तत्काल कदम उठाए।”
उन्होंने बताया कि स्थिति की समीक्षा के लिए कलबुर्गी, बेलगावी और चित्रदुर्ग में संभागीय स्तर की बैठकें की गई थीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और वह स्वयं भी समस्याओं का आकलन करने के लिए विभिन्न जिलों का दौरा कर चुके हैं।
उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल जनता के लिए काम करने और जनसमर्थन हासिल करने के सरकार के प्रयासों से असहज हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध निष्पक्ष तरीके से किया जाना चाहिए।
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें संदेह है कि कथित स्टिंग ऑपरेशन के पीछे विपक्षी दलों का हाथ है, परमेश्वर ने कहा, “देखते हैं। जैसे-जैसे हमें और जानकारी मिलेगी, चीजें स्पष्ट होंगी। मुख्यमंत्री को जानकारी है।”
कर्नाटक कांग्रेस में राजनीतिक मामलों की समिति गठित करने के प्रस्ताव पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी आवश्यकता मौजूदा परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि इस बारे में फैसला पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और मुख्यमंत्री के साथ विचार-विमर्श करके लेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार में गैर-सरकारी पदों पर नियुक्तियों से जुड़े फैसले लेते समय पार्टी और सरकार के बीच समन्वय आवश्यक हो सकता है।
भाषा अमित नरेश
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