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वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल की कानूनी गारंटी देने वाला विधेयक लाएगी केरलम सरकार

तिरुवनंतपुरम, नौ अक्टूबर (भाषा) केरलम सरकार राज्य में वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और सुरक्षा की कानूनी गारंटी देने के प्रावधान वाला विधेयक आगामी विधानसभा सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए उम्मीद जताई कि विधेयक इसी महीने पारित हो जाएगा।

सतीशन ने ‘पीटीआई वीडियो’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य बदलती जनसांख्यिकी, बढ़ती जीवन प्रत्याशा और कुछ परिवारों में वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा की चिंताओं के बीच उन्हें जरूरी देखभाल और सहायता सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा, 'हम वरिष्ठ नागरिकों को कानूनी गारंटी देने के लिए कानून तैयार कर रहे हैं, ताकि उन्हें सुरक्षा मिले और उनकी देखभाल करने वाला कोई मौजूद हो।'

सोमवार से शुरू होने जा रहे विधानसभा सत्र से पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून के तहत यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी कि वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों पर नजर रखी जाए। इसमें यह देखना भी शामिल होगा कि बुजुर्गों ने नाश्ता, दोपहर और रात का खाना खाया है या नहीं और क्या उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि सरकार विधेयक का मसौदा तैयार कर चुकी है और इसे कानून विभाग से मंजूरी मिलना बाकी है। सरकार को उम्मीद है कि आगामी विधानसभा सत्र में इसे पारित कर दिया जाएगा।

सतीशन ने कहा, 'विधानसभा का सत्र 12 अक्टूबर से शुरू होगा। मुझे उम्मीद है कि हम इसी महीने विधेयक पारित कर सकेंगे।'

उन्होंने कहा कि राज्य में हो रहे बड़े जनसांख्यिकीय बदलावों और जीवन प्रत्याशा में लगातार वृद्धि को देखते हुए यह पहल जरूरी है। उन्होंने कहा कि पहले इस मुद्दे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल केवल पारंपरिक कल्याणकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ‘सिल्वर इकोनॉमी’ यानी बुजुर्गों की जरूरतों को पूरा करने वाली सेवाओं की अवधारणा अपनाकर वरिष्ठ नागरिकों को अधिक सक्रिय, रचनात्मक और उपयोगी बनाने का प्रयास करेगी।

उन्होंने कहा, 'इसमें कल्याण का पहलू तो है, लेकिन हम वरिष्ठ नागरिकों को अधिक सक्रिय और रचनात्मक बनाना चाहते हैं। यही सिल्वर इकोनॉमी की अवधारणा को अपनाना है।'

सतीशन ने बुजुर्गों की देखभाल के लिए व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि रोजगार और अन्य अवसरों के लिए युवाओं के विदेश जाने के कारण कई घरों में बुजुर्ग दंपती अकेले रह रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'प्रतिभाओं का पलायन हो रहा है। कई घरों में बुजुर्ग दंपती अकेले रह रहे हैं। हम उनकी सुरक्षा करना चाहते हैं।'

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित पहल के तहत बुजुर्गों को देखभाल और सहायता उपलब्ध कराने के उपाय किए जाएंगे। इसमें खास तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संपन्न बुजुर्गों को भी इस संबंध में सरकारी सहायता की जरूरत पड़ सकती है।

कार्यक्रम के तहत प्रत्येक ग्रामीण क्षेत्र या पंचायत में एक स्वयंसेवक नियुक्त किया जाएगा, जो वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल में मदद करेगा। सतीशन ने बताया कि बुजुर्गों की पहचान करने और उनकी जरूरतों का आकलन करने के लिए आंकड़े जुटाने का काम शुरू हो चुका है।

उन्होंने कहा कि सरकार वरिष्ठ नागरिकों के लिए करीब 12 परियोजनाओं की घोषणा पहले ही कर चुकी है। इनका उद्देश्य कल्याणकारी सहायता को मजबूत करने के साथ-साथ उन्हें अधिक सार्थक और उत्पादक जीवन जीने में मदद करना है।

सतीशन ने देखभाल संबंधी प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र वाले पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना के बारे में भी बताया। इन पाठ्यक्रमों के बाद एक वर्ष का मानदेय होगा। इस पहल से प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने के साथ-साथ बुजुर्गों की देखभाल की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सरकार वरिष्ठ नागरिकों का एक व्यापक डेटाबेस भी तैयार करना चाहती है, ताकि उनकी संख्या का आकलन किया जा सके और सहायता की जरूरत वाले लोगों की पहचान हो सके। इससे कल्याण और देखभाल संबंधी योजनाओं को आंकड़ों के आधार पर तैयार करने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून और उससे जुड़े उपायों का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्य की सहायता व्यवस्था को मजबूत करना है। यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

भाषा माधव

माधव