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आरबीआई की वीआरआरआर नीलामी को मिली बैंकों से ठंडी प्रतिक्रिया

मुंबई, नौ अक्टूबर (भाषा) बैंकों ने करीब 3.88 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी होने के बावजूद शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक की लंबी अवधि की 'परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो' (वीआरआरआर) नीलामी में कम दिलचस्पी दिखाई।

आरबीआई को 10 दिन की नीलामी में 1.50 लाख करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले केवल 18,170 करोड़ रुपये की ही बोलियां मिलीं।

इसके उलट, तीन दिन की वीआरआरआर नीलामी में बैंकों ने 1.50 लाख करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले 1,39,847 करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं।

इससे संकेत मिलता है कि बैंक अपनी अतिरिक्त नकदी को लंबी अवधि के बजाय कम अवधि के लिए केंद्रीय बैंक के पास रखना पसंद कर रहे हैं।

आरबीआई ने 10 दिन की नीलामी में मिली पूरी बोली राशि को 5.49 प्रतिशत की ‘कट-ऑफ’ और भारित औसत दर पर स्वीकार किया।

आठ अक्टूबर को आरबीआई की 29 दिन की वीआरआरआर नीलामी को भी ठंडी प्रतिक्रिया मिली थी, जबकि एक दिन की नीलामी में बैंकों की भागीदारी अधिक रही थी।

आरबीआई पिछले दो महीने से बैंकों से अतिरिक्त नकदी हटाने और अल्पकालिक मुद्रा बाजार की दरों को रेपो दर के अनुरूप रखने के लिए विभिन्न अवधि की वीआरआरआर नीलामियां कर रहा है।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, आठ अक्टूबर तक बैंकिंग प्रणाली में करीब 3.88 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी थी।

बैंकिंग प्रणाली में नकदी बढ़ने की एक प्रमुख वजह बैंकों की ओर से विदेशी मुद्रा अनिवासी-बैंक (एफसीएनआर-बी) जमा का बड़े पैमाने पर जुटाया जाना रहा। इससे बैंकिंग प्रणाली में विदेशी मुद्रा आई, जबकि बाद में आरबीआई के साथ किए गए मुद्रा विनिमय सौदों से बैंकों को रुपये की नकदी मिली।

इसके अलावा, महीने के अंत में वेतन और पेंशन भुगतान सहित सरकारी खर्च से भी बैंकिंग प्रणाली में नकदी बढ़ी।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने छह अक्टूबर को मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि बैंकिंग प्रणाली की अतिरिक्त नकदी को चालू वित्त वर्ष के दौरान मुद्रा की मांग, केंद्रीय बैंक के नकदी प्रबंधन उपायों और बैंकों की आरक्षित निधि संबंधी जरूरतों सहित विभिन्न माध्यमों से कम किया जाएगा।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण