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भारत 6जी सेवा शुरू करने वाले शुरुआती देशों में हो सकता है शामिल: रिलायंस जियो

नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) भारत 2030 में वैश्विक मानक तय होने के बाद 6जी सेवा शुरू करने वाले शुरुआती देशों में शामिल हो सकता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की दूरसंचार इकाई रिलायंस जियो इन्फोकॉम लि. ने शुक्रवार को यह उम्मीद जतायी।

कंपनी ने यहां आयोजित 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस' (आईएमसी) 2026 में 6जी से पहले की प्रौद्योगिकी पर आधारित अपना सिस्टम और गीगा मीमो रेडियो प्रदर्शित किया।

गीगा-मीमो अगली पीढ़ी की वायरलेस एंटीना और बेस स्टेशन प्रौद्योगिकी है, जिसे मुख्य रूप से 6जी नेटवर्क के लिए विकसित किया जा रहा है।

कंपनी के बयान के मुताबिक, उसने 6जी के लिए जरूरी प्रौद्योगिकी विकसित करने की दिशा में काम किया है।

जियो के अनुसार, 6जी नेटवर्क में मौजूदा 5जी नेटवर्क की तुलना में पांच गुना तक अधिक क्षमता हो सकती है, जबकि नेटवर्क की प्रतिक्रिया देने में लगने वाला समय करीब 10 गुना कम करने का लक्ष्य है। इससे नेटवर्क एक साथ अधिक डेटा और ज्यादा उपयोगकर्ताओं को संभाल सकेंगे तथा निर्देशों पर तेजी से प्रतिक्रिया दे सकेंगे।

कंपनी ने कहा कि 6जी से डेटा की गति में भी सुधार होने की उम्मीद है। इससे तुरंत जानकारी देने वाली कृत्रिम मेधा (एआई) सेवाओं, होलोग्राफिक वीडियो, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और अगली पीढ़ी की अन्य डिजिटल सेवाओं के विकास की नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

जियो ने आईएमसी में गीगा मीमो रेडियो को प्रमुख आकर्षण के रूप में पेश किया। कंपनी ने इसे भारत का पहला ऐसा रेडियो बताया। उसने एक ऐसी साझा बेसबैंड इकाई भी प्रदर्शित की, जो 5जी और 6जी दोनों नेटवर्क को समर्थन दे सकती है।

कंपनी ने कहा कि 6जी की दौड़ केवल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और प्रतिक्रिया समय घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अगली पीढ़ी की दूरसंचार प्रौद्योगिकी और वैश्विक मानकों को विकसित करने में योगदान देना भी महत्वपूर्ण है।

जियो के मुताबिक, उसने 8,000 से अधिक पेटेंट आवेदन दायर किए हैं, जिनमें सैकड़ों 6जी से संबंधित हैं। कंपनी ने वैश्विक मानक तय करने की प्रक्रिया में 934 से अधिक योगदान देने का भी दावा किया।

कंपनी को उम्मीद है कि 6जी से एआई आधारित सेवाएं अधिक तेजी से काम कर सकेंगी। इससे उन परिस्थितियों में विशेष लाभ मिल सकता है, जहां तत्काल जानकारी या त्वरित जवाब की जरूरत होती है।

जियो ने आईएमसी में किसानों, चिकित्सकों और विद्यार्थियों के लिए एआई आधारित सेवाओं की संभावनाओं को भी प्रदर्शित किया। कंपनी सुरक्षित नेटवर्क विकसित करने के लिए कृत्रिम मेधा आधारित और क्वांटम कंप्यूटिंग के खतरों से सुरक्षित नेटवर्क प्रौद्योगिकियों पर भी काम कर रही है।

जियो ने कहा कि 6जी को लेकर उसकी योजना केवल अगली पीढ़ी की मोबाइल सेवाएं संचालित करने तक सीमित नहीं है। कंपनी हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, पेटेंट और वैश्विक मानकों के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है।

कंपनी ने अपनी इस पहल को ‘इंडियाज 6जी इन द मेकिंग’ और ‘फ्रॉम इंडिया टू द वर्ल्ड’ के दो विषयों के तहत प्रस्तुत किया है।

भाषा योगेश रमण

योगेश