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रोहतास के पूर्व पुलिस अधीक्षक के खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर पटना उच्च न्यायालय ने उठाए सवाल

पटना, नौ अक्टूबर (भाषा) पटना उच्च न्यायालय ने एक मामले में अपने समक्ष अपील लंबित रहने के दौरान रोहतास की निचली अदालत द्वारा तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही के संबंध में सभी रिकॉर्ड तलब किया है। निचली अदालत ने अपने निर्देशों का कथित रूप से पालन नहीं किए जाने पर यह कार्यवाही शुरू की थी।

उच्च न्यायालय ने इस मामले को ‘‘असामान्य’’ और ‘‘अभूतपूर्व’’ बताया।

न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को पारित आदेश में कहा कि निचली अदालत के 2023 के फैसले पर उच्च न्यायालय में विचार किया जा रहा था, जिसमें झूठी गवाही देने के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश भी शामिल था।

खंडपीठ ने कहा कि ऐसे में निचली अदालत को ‘‘प्रक्रियात्मक औचित्य’’ बनाए रखना चाहिए था।

इसने कहा, ‘‘इस अदालत को यह स्थिति असामान्य और अभूतपूर्व प्रतीत होती है।’’ हालांकि, इसने यह भी कहा कि वह इस चरण में कोई और टिप्पणी नहीं करना चाहती।

अदालत ने रोहतास के प्रधान जिला न्यायाधीश को आपराधिक विविध वाद संख्या 82/2026 में पारित सभी आदेशों और दस्तावेजों सहित पूरी कार्यवाही का रिकॉर्ड और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

यह मामला निचली अदालत के निर्देशों का कथित रूप से पालन नहीं किए जाने को लेकर शुरू किया गया था।

बिहार के महाधिवक्ता एसडी संजय के जल्द सुनवाई के अनुरोध पर उच्च न्यायालय ने अपील को 25 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि उस दिन इसे शुरुआती पांच मामलों में शामिल किया जाए।

महाधिवक्ता ने बताया कि निचली अदालत ने रोहतास के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को एक व्यक्ति के खिलाफ कथित तौर पर झूठा बयान देने के लिए प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था, और बाद में आदेश का पालन न करने के आरोप में पूर्व पुलिस प्रमुख के खिलाफ़ आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की और जुर्माना लगाया।

उन्होंने कहा कि वैधानिक प्रावधानों के तहत कोई अदालत झूठी गवाही के मामले में सीधे प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश नहीं दे सकती, और ऐसी स्थिति में अदालत स्वयं औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज करा सकती है।

महाधिवक्ता ने दलील दी कि निचली अदालत ने अपने फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने और निचली अदालत का रिकॉर्ड उच्च न्यायालय को प्राप्त हो जाने के बाद भी इस मामले में आदेश पारित करना जारी रखा।

उच्च न्यायालय ने महाधिवक्ता को रोहतास के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के शपथपत्र के साथ संबंधित दस्तावेज और अन्य सामग्री प्रस्तुत करने की अनुमति दे दी।

खंडपीठ ने कहा कि निचली अदालत के निर्देशों और उनसे जुड़े अन्य मुद्दों पर अंतिम सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा। अदालत ने आदेश दिया, ‘‘इस बीच, आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और मामले को जल्दबाजी में आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।’’

भाषा सं कैलाश

वैभव नेत्रपाल

नेत्रपाल