जयपुर, नौ अक्टूबर (भाषा) राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शुक्रवार को कहा कि साहित्य समाज की धड़कन है और साहित्य सृजन के दौरान संयम एवं मर्यादा का ध्यान रखना आवश्यक है।
वह सीकर में शेखावाटी साहित्य संगम को संबोधित कर रहे थे।
बागडे ने भारतीय साहित्य एवं ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी साहित्यकारों ने भी भारतीय साहित्य की सराहना की है।
उन्होंने कहा, “महाभारत और रामायण जैसे महाकाव्यों का अध्ययन विदेशों में भी किया जाता है। वेदों का जर्मन भाषा में अनुवाद किया गया है। भारतीय उपनिषदों में निहित ज्ञान का महत्व सदियों तक बना रहेगा।”
राज्यपाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा ने विश्व को ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है तथा शून्य की अवधारणा ने गणना की पद्धति को नयी दिशा दी।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राज्यपाल ने राजस्थान की लोक संस्कृति एवं साहित्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां लोकगीतों और लोक परंपराओं के माध्यम से बच्चों में बचपन से ही मातृभूमि की रक्षा, वीरता और त्याग के संस्कार विकसित किए जाते हैं।
बागडे ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी नागरिकों को अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय योगदान देना चाहिए।
उन्होंने राष्ट्र के विकास में शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया।
भाषा पृथ्वी जितेंद्र
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