Breaking News

एमएलसी चुनाव: मेरठ-बरेली में बीजेपी की जीत     |   भाजपा प्रत्याशी डॉ हरि सिंह ढिल्लों की बड़ी जीत, 17676 मतों से विजयी     |   इजरायल चुनाव: एग्जिट पोल में बेंजामिन नेतन्याहू को बहुमत नहीं     |   सूडान के दारफुर में बाजार पर ड्रोन हमला, 102 लोगों की मौत, सेना पर आरोप     |   बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन की चांदनी चौक इलाके में पदयात्रा आज     |  

भारत कई फसलों में आत्मनिर्भर, पानी की उपलब्धता अब भी बड़ी चुनौतीः संयुक्त राष्ट्र एजेंसी

(फरहान खान)

नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) भारत ने कई फसलों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाया है, लेकिन वर्षा पर निर्भर खेती के कारण पानी की उपलब्धता और उसका प्रबंधन अब भी चुनौती बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी के प्रमुख ने यह बात कही है।

अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (आईएफएडी) के अध्यक्ष अल्वारो लारियो ने पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में कहा कि कई फसलों में आत्मनिर्भरता से भारत की कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने की क्षमता बढ़ी है। हालांकि, पानी की उपलब्धता और उसका प्रबंधन अब भी बड़ी चुनौती है।

लारियो ने कहा, “भारत ने कई फसलों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल की है, जिससे मेरा मानना है कि कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने की उसकी क्षमता भी बढ़ी है। हालांकि, वर्षा पर निर्भर खेती के कारण पानी की उपलब्धता और उसका प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है।”

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश के शुद्ध बुवाई वाले रकबे के करीब 60 प्रतिशत हिस्से में वर्षा आधारित खेती होती है, जिसका कुल खाद्य उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत योगदान है।

लारियो ने कहा कि खाद्य सुरक्षा के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ पौष्टिक भोजन को किफायती बनाना और ग्रामीण आजीविका में सुधार करना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा, “हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पौष्टिक आहार की लागत है।”

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के अनुसार, भारत की अनुमानित 40.4 प्रतिशत आबादी वर्ष 2024 में स्वस्थ आहार का खर्च उठाने में सक्षम नहीं थी।

भारत की यात्रा पर आए लारियो ने कहा कि आईएफएडी ने देश में 37 परियोजनाओं के तहत करीब 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है और 60 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहुंच बनाई है। इनमें महिलाएं, आदिवासी समुदाय और छोटे किसान शामिल हैं।

आईएफएडी ग्रामीण गरीबी कम करने और खाद्य प्रणालियों में बदलाव लाने की दिशा में काम करता है।

इस संस्था ने मई में भारत के लिए 2026-2033 की अवधि की नई रणनीति शुरू की, जिसका लक्ष्य करीब 30 लाख ग्रामीण परिवारों यानी 1.32 करोड़ लोगों तक पहुंचना है। इसका उद्देश्य ग्रामीण समुदायों को जलवायु और आर्थिक झटकों से निपटने में सक्षम बनाना है।

लारियो ने कहा कि आईएफएडी की प्राथमिकता में पूर्वोत्तर क्षेत्र और हिमालयी राज्य शामिल हैं। मेघालय में आईएफएडी ने जैविक मसालों के प्रसंस्करण संयंत्र में निवेश किया है। इस संयंत्र की सालाना प्रसंस्करण क्षमता 10,000 टन से अधिक है और यह करीब 5,500 किसानों के साथ काम करता है।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण