मुंबई, नौ अक्टूबर (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि अल नीनो के कारण पड़े सूखे, फसलों को हुए भारी नुकसान और आने वाले महीनों में पेयजल तथा चारे की कमी की आशंका राज्य के सामने सबसे बड़ी तात्कालिक चुनौतियां हैं।
फडणवीस ने 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव' में कहा कि राज्य की करीब 75 प्रतिशत फसलें प्रभावित हुई हैं, जिससे भारी नुकसान हुआ है और सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए उपायों की योजना बना रही है।
मुख्यमंत्री से जब पूछा गया कि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं, तो उन्होंने कहा, 'चुनौतियां हमेशा रहती हैं। हम एक विकासशील अर्थव्यवस्था हैं और ऐसी अर्थव्यवस्था में कोई न कोई चुनौती बनी रहती है लेकिन अगर आप तात्कालिक चुनौती के बारे में पूछते हैं, तो मेरा मानना है कि इस साल अल नीनो के कारण पड़ा सूखा सबसे बड़ी चुनौती है।'
अल नीनो जलवायु की ऐसी स्थिति है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। भारत में इसके कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून की हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे अक्सर कम बारिश होती है और सूखे तथा लू का खतरा बढ़ जाता है।
फडणवीस ने कहा, 'महाराष्ट्र में करीब 75 प्रतिशत फसलें प्रभावित हुई हैं, जिससे भारी नुकसान हुआ है। आने वाले महीनों में पेयजल की समस्या भी हो सकती है और मवेशियों के लिए चारे की कमी भी हो सकती है। हम इन चुनौतियों से निपटने की तैयारी अभी से कर रहे हैं।'
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र का 52 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र सूखे की आशंका वाला है, क्योंकि राज्य का बड़ा हिस्सा वर्षा-छाया क्षेत्र (ऐसा क्षेत्र जहां पर्वतों के दूसरी ओर स्थित होने के कारण अपेक्षाकृत कम वर्षा होती है) में आता है, जहां पर्याप्त बारिश नहीं होती।
उन्होंने कहा, 'ऐसा हमेशा से रहा है, क्योंकि महाराष्ट्र का बड़ा हिस्सा वर्षा-छाया क्षेत्र में आता है। यहां पर्याप्त बारिश नहीं होती और लौटता हुआ मानसून ही बारिश का मुख्य स्रोत है।'
फडणवीस ने इसे एक विरोधाभास बताते हुए कहा कि देश के 40 प्रतिशत बड़े बांध महाराष्ट्र में हैं, इसके बावजूद राज्य को बार-बार सूखे की समस्या का सामना करना पड़ता है।
महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को बारिश की कमी के बीच राज्य की 358 में से 265 तहसीलों यानी करीब 74 प्रतिशत क्षेत्र में सूखा घोषित किया था। सरकार ने इसके साथ ही फसल ऋण के पुनर्गठन, भूमि राजस्व में रियायत और बिजली बिलों में सब्सिडी सहित राहत उपायों की घोषणा की थी।
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