कोच्चि, नौ अक्टूबर (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने 2012-13 में एक नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के मामले में 55 वर्षीय ऑटो चालक को सुनाई गई उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। आरोपी लड़की को स्कूल ले जाने और वहां से लाने का काम करता था।
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की पीठ ने अपील लंबित रहने के दौरान ऑटो चालक की मौत हो जाने के बावजूद मामले में सुनवाई की और उसकी अपील खारिज कर दी।
पीठ ने दोषसिद्धि और सजा बरकरार रखते हुए कहा कि घटना के समय चौथी कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची की गवाही सुसंगत और एकरूप थी।
पीठ ने कहा, ‘‘ हमारी राय में, कथित विसंगतियां अभियोजन पक्ष के मामले की बुनियाद को प्रभावित नहीं करतीं और न ही उसकी (बच्ची की) गवाही के मूल तत्व पर कोई असर डालती हैं। निचली अदालत को गवाही के दौरान उसके आचरण का अवलोकन करने और अभिलेख पर उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के संदर्भ में उसकी गवाही का आकलन करने का अवसर मिला था। समस्त साक्ष्यों का स्वतंत्र रूप से पुनर्मूल्यांकन करने पर हमें ऐसी कोई महत्वपूर्ण असंगति या विरोधाभास नहीं मिलता, जिसके आधार पर उसकी गवाही को खारिज करना उचित हो।’’
उसने कहा कि साक्ष्यों और निचली अदालत के निष्कर्षों का स्वतंत्र आकलन करने के बाद उसे सत्र न्यायाधीश के निष्कर्षों में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं मिला।
पीठ ने कहा, ‘‘इसलिए अपील खारिज की जाती है और दोषी पाए जाने, दोषसिद्धि तथा सजा के फैसले को बरकरार रखा जाता है।’’
उच्च न्यायालय ने अपील पर सुनवाई जारी रखने का फैसला इसलिए किया था, क्योंकि इसमें कारावास और जुर्माने की संयुक्त सजा को चुनौती दी गई थी।
भाषा शोभना
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