नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस ने अमेरिका द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख भारतीय कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (पीईआरएम) से निलंबित किए जाने के बाद शुक्रवार को कहा कि भारत के पास जवाबी कदम उठाने के विकल्प मौजूद हैं, लेकिन ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ (समझौता कर चुके) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इनका इस्तेमाल नहीं करेंगे।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि ‘‘धौंस जमाने वालों’’ को खुश करने के लिए समझौता करने से कोई फायदा नहीं होता।
रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अमेरिका सरकार की ओर से भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पेशेवरों को सीधे निशाना बनाए जाने की कार्रवाई से एक बार फिर साबित हो गया है कि धौंस जमाने वालों को खुश करने का कोई फायदा नहीं होता।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम मोदी सरकार द्वारा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए उठाए गए कदम के कुछ ही समय बाद आया है।
रमेश ने दावा किया कि सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए होने वाले लेनदेन पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) शुल्क लागू कर ऐसा कदम उठाया है, जिससे अमेरिकी कंपनियों को सीधे तौर पर फायदा होगा।
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि भारत के पास संसद से पारित डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और उसके तहत बनाए गए नियमों के जरिए अमेरिका के खिलाफ जवाबी कदम उठाने के कई विकल्प मौजूद हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ‘ज्ञानेशगेट’ मामले के कारण दबाव में आई सरकार इन विकल्पों का इस्तेमाल नहीं करेगी।
रमेश ने प्रधानमंत्री को ‘‘पूरी तरह समझौता कर चुका’’ करार देते हुए दावा किया कि उनकी सरकार भारतीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने में सक्षम नहीं है।
अमेरिकी श्रम विभाग ने बृहस्पतिवार को कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की थी। माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी को भी इस कार्यक्रम से निलंबित किया गया है।
विभाग के अनुसार, इन कंपनियों से जुड़ी स्थायी श्रम प्रमाणन की नयी अर्जियां स्वीकार नहीं की जाएंगी और लंबित अर्जियों पर भी कार्रवाई नहीं होगी। पीईआरएम रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड प्राप्त करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है।
भाषा हक
सिम्मी
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