नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस ने अमेरिका द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख भारतीय कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन (पीईआरएम) कार्यक्रम से निलंबित किए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार को अमेरिका के साथ बातचीत में अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए।
पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि महंगे एच-1बी शुल्क के कारण अमेरिकी कंपनियां पहले ही भारतीय पेशेवरों को नियुक्त करने को लेकर दोबारा सोचने लगी हैं।
उन्होंने कहा कि अब प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियों को श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित किए जाने से अमेरिका में कार्यरत भारतीय कंपनियों के लिए भारतीय पेशेवरों को स्थायी निवास की खातिर प्रायोजित करना और मुश्किल हो गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को बार-बार सलाह दी है कि अमेरिका के साथ बातचीत में मजबूती से अपना पक्ष रखें और ऐसा व्यवहार करें जैसे उनके पास वास्तव में 56 इंच का सीना है।’’
खेड़ा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की सलाह मानने के बजाय प्रधानमंत्री मोदी ‘‘अपने दोस्त डोनाल्ड ट्रंप’’ के सामने झुकना पसंद करते हैं।
अमेरिकी श्रम विभाग ने बृहस्पतिवार को कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी को श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की। माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी को भी इस कार्यक्रम से निलंबित किया गया है।
विभाग के अनुसार, इन कंपनियों से जुड़ी नयी या लंबित स्थायी श्रम प्रमाणन अर्जियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। पीईआरएम रोजगार आधारित ‘ग्रीन कार्ड’ की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण चरण है।
भाषा हक अविनाश
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