कोलकाता, आठ अक्टूबर (भाषा) निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने बृहस्पतिवार को कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए हर कदम पर संघर्ष करना पड़ता है, चाहे वह परिवार के भीतर हो या बाहर।
नसरीन यहां एक सम्मान समारोह में भाग ले रही थीं। उन्होंने महिलाओं के समान अधिकारों की पैरवी करते हुए अपनी कविताओं का पाठ भी किया।
उन्होंने ‘शिकल भंगार गोलपो’ (जंजीरें तोड़ने की कहानी) कविता का पाठ करते हुए अपनी मां को याद किया, जिन्होंने परिवार के सभी सदस्यों की खुशी के लिए मेहनत की और अपनी परेशानियों को चुपचाप सहती रहीं।
नसरीन ने कहा, ‘‘महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए हर कदम पर संघर्ष करना पड़ता है, चाहे वह परिवार के भीतर हो या बाहर। वह जो सेवा करती हैं, उसका कोई हिसाब नहीं होता, लेकिन जब उनसे कोई छोटी सी भी चूक होती है तो उसे गिना जाता है।’’
उन्होंने कहा कि किसी महिला को बदनाम करने का सबसे बड़ा हथियार उसके चरित्र पर सवाल उठाना है और महिलाओं से ऐसी विपरीत परिस्थितियों का बहादुरी से सामना करने का आह्वान किया।
भाषा राखी अविनाश
अविनाश