लखनऊ, आठ अक्टूबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य विधि अधिकारियों की नियुक्ति और कार्यप्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पीठ ने राज्य सरकार को यह विचार करने का निर्देश दिया है कि पद पर रहते हुए राज्य विधि अधिकारी बार एसोसिएशन या बार काउंसिल का चुनाव लड़ सकते हैं या नहीं।
अदालत ने इस संबंध में कोई निर्णय लेने से पहले बार, बार एसोसिएशन, बार काउंसिल और राज्य विधि अधिकारियों समेत सभी संबंधित पक्षों से परामर्श करने को कहा गया है।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की पीठ ने कहा कि राज्य विधि अधिकारियों की नियुक्ति से पहले मुकदमों के कार्यभार के आधार पर उनकी वास्तविक जरूरत का उचित आकलन किया जाना चाहिए।
चयन प्रक्रिया पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ हो तथा नियुक्तियां योग्यता, अनुभव, दक्षता, ईमानदारी, आचरण और पद के लिए उपयुक्तता के आधार पर की जाएं।
पीठ ने शासकीय अधिवक्ता, अपर शासकीय अधिवक्ता, मुख्य स्थायी अधिवक्ता, अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता, स्थायी अधिवक्ता तथा दीवानी और आपराधिक मामलों के ‘ब्रीफ होल्डर’ की नियुक्ति के संबंध में आठ बिंदुओं वाले दिशा-निर्देश तय किए हैं।
पीठ ने कहा कि विधि अधिकारियों की जरूरत का आकलन केवल आपराधिक मामलों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार को सभी प्रकार के मुकदमों और उनमें विधि अधिकारियों के कार्यभार को ध्यान में रखते हुए आवश्यकता का निर्धारण करना होगा। नियुक्ति के लिए पात्रता और चयन के स्पष्ट मानदंड भी पहले से निर्धारित किए जाने चाहिए।
अदालत ने कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि या अवांछनीय आचरण वाले व्यक्ति को राज्य विधि अधिकारी नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए। चयन और नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया, पात्रता मानदंड और जरूरत के आकलन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। कानून की अनुमति की सीमा तक इसकी जानकारी सार्वजनिक भी की जानी चाहिए।
पीठ ने राज्य सरकार को उपलब्धता के आधार पर महिला अधिवक्ताओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर भी विचार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि राज्य विधि अधिकारियों की नियुक्ति में योग्यता और उपयुक्तता के साथ-साथ न्याय प्रशासन की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि किसी राज्य विधि अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने अथवा आपराधिक मामला दर्ज किए जाने पर उसकी प्रति तत्काल महाधिवक्ता को भेजी जाए। महाधिवक्ता को मामले में पेशेवर ईमानदारी और न्याय प्रशासन के मानकों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।
अदालत ने राज्य के खिलाफ किसी निजी पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले राज्य विधि अधिकारी के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य किया है। एनओसी वकालतनामे के साथ दाखिल करनी होगी।
इसका उल्लंघन होने पर संबंधित विधि अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि यह प्रतिबंध ‘ब्रीफ होल्डर’ पर लागू नहीं होगा।
पीठ ने कहा कि राज्य विधि अधिकारी के पद पर रहते हुए बार एसोसिएशन या बार काउंसिल का चुनाव लड़ने की अनुमति होनी चाहिए या नहीं, इस विषय पर राज्य सरकार को व्यापक विचार करना होगा।
निर्णय लेने से पहले बार, बार एसोसिएशन, बार काउंसिल और राज्य विधि अधिकारियों समेत संबंधित हितधारकों की राय ली जाएगी। इसके बाद ही इस संबंध में उचित निर्णय लिया जाएगा।
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसके द्वारा की गई टिप्पणियों और जारी दिशा-निर्देशों का उद्देश्य पहले से की गई राज्य विधि अधिकारियों की नियुक्तियों को प्रभावित करना नहीं है। ये निर्देश भविष्य में होने वाली नियुक्तियों की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष, वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत बनाने के उद्देश्य से दिए गए हैं।
भाषा सं आनन्द
संतोष
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