प्रयागराज (उप्र), आठ अक्टूबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को विभोर राणा और विशाल सिंह की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं को मंजूरी दे दी और कोडीन आधारित कफ सिरप की कथित कालाबाजारी और अवैध तस्करी से जुड़े मामलों में उनकी हिरासत को रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार के वकीलों की दलील सुनने के बाद यह आदेश दिया।
याचिकाकर्ताओं ने ‘निवारक हिरासत’ कानून के तहत दोनों के खिलाफ सात जुलाई, 2026 को जारी हिरासत आदेशों को चुनौती दी थी।
याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि हिरासत आदेश जारी करते समय उचित सोच-विचार नहीं किया गया। राणा के मामले में यह भी तर्क दिया गया कि जांच के दौरान सह-आरोपियों के बयानों से उनका नाम सामने आया था।
याचिकाओं में लखनऊ और गाजियाबाद में दर्ज उन मामलों में ‘निवारक हिरासत’ की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी, जो कोडीन आधारित कफ सिरप ‘फेंसेडिल’ के अवैध व्यापार और कालाबाजारी से जुड़े एक कथित रैकेट से संबंधित थे। आरोप था कि याचिकाकर्ता इस रैकेट के मुख्य सरगनाओं में से एक थे।
अदालत के सामने मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया कि ‘फेंसेडिल’ न तो कोई नशीला पदार्थ है और न ही स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) के प्रावधान केवल इसलिए लागू नहीं किए जा सकते क्योंकि इसके ‘फॉर्मूलेशन’ में कोडीन है।
भाषा सं आनन्द शफीक
शफीक