प्रयागराज (उप्र), आठ अक्टूबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पत्रकार सत्यम वर्मा की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत निवारक हिरासत को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए मजदूरों के प्रदर्शन में वर्मा की कथित भूमिका से जुड़ी है।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा।
वर्मा ने गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम द्वारा रासुका की संबंधित धाराओं के तहत पारित 12 मई 2026 के हिरासत आदेश और उसके बाद राज्य सरकार द्वारा दी गई मंजूरी को चुनौती दी है।
याचिका में हिरासत आदेश और उसके परिणामस्वरूप पारित आदेशों को रद्द करने के साथ-साथ वर्मा की तत्काल रिहाई तथा कथित अवैध हिरासत के लिए मुआवजे की मांग की गई है।
याचिका का मुख्य आधार यह है कि हिरासत आदेश इस ‘‘तथ्यात्मक रूप से असंभव’’ धारणा पर आधारित था कि वर्मा 13 अप्रैल 2026 को नोएडा में हिंसा में शामिल थे।
याचिका के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से पता चलता है कि वर्मा उस दिन लगभग 500 किलोमीटर दूर लखनऊ में थे, जहां उन्हें उसी दिन दोपहर 2:14 बजे हसनगंज पुलिस ने कथित तौर पर हिरासत में लिया था।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जांच अधिकारी ने हसनगंज थाने के सीडीआर और सीसीटीवी फुटेज को जानबूझकर हिरासत प्राधिकारी से छिपाया। यह भी दावा किया गया है कि हिरासत के लिए राज्य द्वारा भरोसा की गई 11 प्राथमिकी में से किसी में भी वर्मा का नाम नहीं था।
याचिका के अनुसार, हिरासत आदेश पुलिस हिरासत में मौजूद सह-आरोपी मंगल द्वारा कथित तौर पर दिए गए बयानों पर आधारित था।
भाषा सं आनन्द
शफीक
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