कोलकाता, आठ अक्टूबर (भाषा) एनसीपीआई के साथ जुड़ने वाले तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों की बृहस्पतिवार को यहां हुई बैठक में आधे सांसद शामिल नहीं हुए। बैठक में सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष लंबित अयोग्यता याचिका के मद्देनजर आगे की कानूनी और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की।
बैठक में शामिल सांसदों ने 10 सांसदों की गैरमौजूदगी को तवज्जो नहीं देते हुए कहा कि उनमें से कुछ विदेश में हैं और कुछ अन्य जगह व्यस्त हैं।
वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय द्वारा यहां एक होटल में बुलाई गई बैठक में दुर्गा पूजा से पहले सांसदों के लिए चिकन और मटन के व्यंजन, पुलाव और मिठाइयों का भी इंतजाम किया गया था।
हालांकि, 10 सांसदों की गैरमौजूदगी ने इस कार्यक्रम में राजनीतिक रंग जोड़ दिया, जिसे पूजा से पहले की आपसी मुलाकात के तौर पर पेश किया गया था।
बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसदों में काकोली घोष दस्तीदार, सायनी घोष, यूसुफ पठान, माला रॉय, जून मालिया, पार्थ भौमिक, मिताली बाग, कालीपद सोरेन, देव और असित मल हैं।
बंदोपाध्याय के अलावा बैठक में अबू ताहेर, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, बापी हल्दर, रचना बनर्जी और अरूप चक्रवर्ती मौजूद थे।
आधे सांसदों की गैरमौजूदगी के बारे में पूछे जाने पर बांकुड़ा के सांसद अरूप चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘कोई अमेरिका गए हुए हैं, किन्हीं का बेटा बीमार है और कोई अन्य बैठक में हैं।’’
उन्होंने कहा कि गैरहाजिर सांसदों से फोन पर संपर्क किया गया था।
शर्मिला सरकार ने समूह में किसी तरह के मतभेद की अटकलों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘जो लोग नहीं आ सके, उनके साथ गलतफहमी का कोई सवाल ही नहीं है।’’
शताब्दी रॉय ने भी सांसदों की मौजूदगी को लेकर अटकलों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी।
उन्होंने कहा, ‘‘देखिए, कौन आ रहा है और कौन जा रहा है, हम इसका हिसाब नहीं रख रहे हैं क्योंकि इसका कोई महत्व नहीं है।’’
रॉय ने कहा कि समूह को पहले से पता था कि 10 सांसद नहीं आएंगे क्योंकि कुछ बाहर हैं और कुछ की पहले से तय व्यस्तताएं थीं, जिनमें ‘दिशा’ बैठकों समेत अन्य कार्यक्रम शामिल हैं।
रचना बनर्जी ने इस बैठक को औपचारिक राजनीतिक बैठक के बजाय पूजा से पहले की आपसी मुलाकात बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘हम आज सिर्फ इसलिए मिले क्योंकि दुर्गा पूजा शुरू होने वाली है और साथ मिलना बहुत जरूरी था।’’
उन्होंने कहा कि आम तौर पर ये सांसद संसद में मिलते हैं, जहां सभी साथ होते हैं, लेकिन बंगाल लौटने के बाद अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में वे व्यस्त हो जाते हैं।
हालांकि, उत्सव के माहौल और सामान्य मेलजोल के दावों के बीच यह बैठक बागी सांसदों के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में हुई।
दलबदल रोधी कानून के तहत अयोग्यता के नोटिस पर जवाब देने के लिए बिरला द्वारा दी गई दो सप्ताह की समयसीमा बृहस्पतिवार को समाप्त हो गई।
घोष दस्तीदार ने इससे पहले ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया था कि सांसदों ने अब अपने जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का और समय मांगने का फैसला किया है।
नोटिस में सांसदों से पूछा गया है कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस क्यों छोड़ी और एनसीपीआई के साथ क्यों जुड़े तथा उनके खिलाफ दलबदल रोधी प्रावधान क्यों नहीं लागू किए जाने चाहिए।
यह नवीनतम अनुरोध इन 20 सांसदों द्वारा अपनी संसदीय स्थिति को लेकर चल रही लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई में समय बढ़ाने का चौथा प्रयास होगा।
सांसदों ने सितंबर में जवाब देने के लिए शुरू में चार सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने उन्हें इसके बजाय दो सप्ताह का समय दिया था। अब फिर दो सप्ताह का समय मांगा गया है।
भाषा राखी अविनाश
अविनाश