नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्र को दो सप्ताह में एक समिति गठित करने का निर्देश दिया, जो दवा कंपनियों की अनैतिक विपणन गतिविधियों से जुड़े मुद्दों की समग्र और व्यापक जांच करेगी।
शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि समिति समयबद्ध तरीके से इस कार्य को पूरा करने का प्रयास करेगी और उचित रूप से परामर्श प्रक्रिया पूरी करने तथा उसके समक्ष रखी गई सामग्री और सुझावों पर विचार करने के बाद, अपनी पहली बैठक की तारीख से दो महीने के भीतर केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने उस याचिका पर यह आदेश पारित किया, जो स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों के साथ अपने लेन-देन में फार्मास्युटिकल कंपनियों द्वारा अनैतिक मार्केटिंग और प्रचार प्रथाओं की कथित व्यापकता से संबंधित थी।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि इस तरह की गतिविधियों में प्रत्यक्ष या परोक्ष आर्थिक लाभ, उपहार, प्रायोजित यात्राएं, मनोरंजन और अन्य प्रलोभन शामिल हैं, जो चिकित्सकों को इस सोच के साथ दिए जाते हैं कि वे परामर्श में संबंधित कंपनी की दवाओं को शामिल करें।
पीठ ने इस बात का संज्ञान लिया कि केंद्र ने इस मुद्दे के अध्ययन के लिए तीन-सदस्यीय समिति बनाने का प्रस्ताव रखा है।
केंद्र ने आठ सितंबर को शीर्ष अदालत को बताया था कि वह दवा कंपनियों को अनैतिक गतिविधियों में शामिल होने से रोकने के लिए वैधानिक व्यवस्था का सुझाव देने के वास्ते तीन-सदस्यीय समिति गठित कर रहा है।
पीठ ने आदेश सुनाते हुए कहा, ‘‘हमने भारत सरकार को एक समिति गठित करने का निर्देश दिया है और समिति सुझावों एवं अभ्यावेदनों पर विचार करेगी तथा इसके बाद भारत सरकार को अपनी सिफारिशें देगी।’’
पीठ ने मामले को केंद्र की ओर से अनुपालन संबंधी हलफनामे पर विचार के लिए 29 जनवरी के लिए सूचीबद्ध किया।
भाषा वैभव सुरेश
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