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जीएसटी सुधारों से कारोबार करना होगा आसान, राजस्व में बनी रहेगी निरंतरता: सीतारमण

नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को कहा कि अगली पीढ़ी की जीएसटी रूपरेखा के तहत किए गए प्रक्रिया संबंधी सुधार अगले एक साल में व्यवस्थित हो जाएंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि इन बदलावों से कारोबार करना आसान होगा और केंद्र तथा राज्यों का राजस्व भी बेहतर बना रहेगा।

सीतारमण ने यहां जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में लिए गए विभिन्न फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि पिछले साल की गई जीएसटी दरों में कटौती से राजस्व का कोई नुकसान नहीं हुआ है। कर संग्रह लगातार बढ़ रहा है।

जीएसटी की संशोधित दरें 22 सितंबर, 2025 से लागू की गई। इससे टूथपेस्ट और शैम्पू से लेकर कार और टेलीविजन तक 375 वस्तुओं की कीमतों में कमी आई।

पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत की कर दरों को मिलाकर दो दरें...पांच और 18 प्रतिशत...की गईं। इससे दैनिक उपयोग की 99 प्रतिशत वस्तुओं की कीमतें कम हुईं।

उन्होंने कहा कि दरों में कटौती से शुरू हुई अगली पीढ़ी की जीएसटी व्यवस्था केंद्र और राज्यों के लिए राजस्व का एक सकारात्मक, पारदर्शी और स्थिर स्रोत बनकर उभरी है।

सीतारमण ने कहा, ‘‘उन्हें उम्मीद है कि प्रक्रिया संबंधी सुधारों को भी राज्य और कंपनियां स्वीकार करेंगी, जिससे व्यवस्था को और स्थिर करने में मदद मिलेगी।’’

प्रक्रिया संबंधी सुधार एक अप्रैल, 2027 से लागू किए जाने हैं और नई व्यवस्था को पूरी तरह स्थिर और व्यवस्थित होने में करीब एक साल लगेगा।

सीतारमण ने कहा, ‘‘इसे एक अप्रैल, 2027 से लागू किया जाएगा। प्रक्रिया संबंधी सुधारों की इस व्यवस्था को स्थिर होने में पूरा एक साल लगेगा।’’

उन्होंने कहा कि व्यवस्था के स्थिर होने के बाद अगली पीढ़ी की जीएसटी प्रणाली कारोबार सुगमता बढ़ाएगी, राज्यों और केंद्र के लिए राजस्व सुनिश्चित करेगी। साथ ही कारोबारियों को यह भरोसा देगी कि कर व्यवस्था कारोबार को सुगम बनाने के साथ अधिक निश्चितता भी प्रदान करती है।

सीतारमण ने इसे जीएसटी परिषद की एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस संस्थान के विकास ने सहकारी संघवाद की मजबूती को प्रदर्शित किया है।

उन्होंने 2019 से पहले, कोविड-19 महामारी के दौरान और उसके तुरंत बाद जीएसटी परिषद के सामने आई चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि संस्थान काफी परिपक्व हुआ है। अब केंद्र तथा राज्य राजस्व जैसे कठिन और संवेदनशील मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद आज इस बात का उदाहरण है कि केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग से परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘मुझे इस पर गर्व है और मैं आभारी हूं कि प्रधानमंत्री ने मुझे ऐसे संस्थान में काम करने का अवसर दिया, जो एक मिसाल बन चुका है।’’

सीतारमण ने कहा कि जीएसटी परिषद ने मुख्य रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़ी विसंगतियों और उलट शुल्क दर की समस्या का काफी हद तक समाधान कर दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मुझे नहीं लगता कि अब कारोबार सुगमता या विसंगतियों और दरों के लिहाज से बहुत से बुनियादी मुद्दे लंबित हैं। आप कह सकते हैं कि चाहे वे दर से जुड़े हों या प्रक्रिया से अगली पीढ़ी के जीएसटी से जुड़े 99 प्रतिशत मुद्दों का समाधान हो चुका है।’’

भाषा रमण अजय

अजय