Breaking News

लखनऊ स्नातक MLC चुनाव में सपा की उम्मीदवार कांति सिंह ने दर्ज कराई जीत     |   NEET प्रोटेस्ट के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल पर SC में सुनवाई आज     |   सऊदी अरब में हमलों का खतरा, अमेरिका ने अपने कर्मचारियों को देश छोड़ने का दिया आदेश     |   गोवा के वास्को में भीषण आग, कार एक्सेसरीज की दुकान जलकर खाक, मौके पर पहुंचे CM     |   दिल्ली-NCR में मौसम ने ली करवट, कहीं बूंदाबांदी तो कहीं तेज बारिश, मौसम विभाग का येलो अलर्ट     |  

तृणमूल के बागी सांसदों ने नोटिस का जवाब देने के लिए दो और सप्ताह का समय मांगा

कोलकाता, आठ अक्टूबर (भाषा) नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने बृहस्पतिवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के उन नोटिस का जवाब देने के लिए दो और सप्ताह का समय मांगा, जो दल-बदल रोधी कानून के तहत उनकी अयोग्यता की मांग वाली याचिका पर जारी किए गए थे। इससे संसद में उनकी स्थिति को लेकर जारी राजनीतिक रूप से संवेदनशील विवाद और लंबा खिंच गया है।

यह नया अनुरोध आठ अक्टूबर को किया गया, जो लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय द्वारा सांसदों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तय की गई अंतिम तारीख थी।

बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि सांसदों ने लगातार यह रुख अपनाया है कि उनके नए राजनीतिक गठजोड़ के कारण उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि उनके (सांसदों के) वकील अभी दस्तावेज एकत्र कर रहे हैं, इसलिए वे अब तक अपना कानूनी जवाब अंतिम रूप नहीं दे पाए हैं।

घोष दस्तीदार ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘आज हमारे जवाब भेजने की अंतिम तारीख खत्म होने वाली है। हम लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर दो और सप्ताह का समय मांग रहे हैं।’’

अधिक समय मांगने के अनुरोध पर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट ने तत्काल तीखी प्रतिक्रिया दी और इस देरी को बागी सांसदों के खिलाफ राजनीतिक हमला करने के मुद्दे के तौर पर इस्तेमाल किया।

तृणमूल नेता कुणाल घोष ने कहा, 'उन्हें खुद नहीं पता कि वे अब किस पार्टी में हैं। यह बताने के लिए भी उन्हें समय चाहिए। ये दलबदलू, अवसरवादी और कृतघ्न लोग बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, फेसबुक पर क्रांति करते हैं और भाजपा विरोधी वोटों के सहारे चुनाव जीतते हैं, लेकिन अब भाजपा के हितों का पोषण कर रहे हैं। वे एक नोटिस का जवाब भी नहीं दे सकते?'

लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने 25 सितंबर को सांसदों को आठ अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। इससे पहले सांसदों ने चार सप्ताह का समय मांगा था, जबकि उससे पहले मिली तीन सप्ताह की मोहलत भी समाप्त हो चुकी थी।

अयोग्यता की यह कार्यवाही तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा 18 जून को दायर की गई याचिकाओं के बाद शुरू हुई। पार्टी के 27 लोकसभा सांसदों में से 20 ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी से अलग होकर एनसीपीआई का दामन थाम लिया और भाजपा नीत राजग को समर्थन दिया था।

बागी सांसदों ने लोकसभा में एक अलग राजनीतिक इकाई के रूप में मान्यता मांगी है, लेकिन संसदीय रिकॉर्ड में अब भी उन्हें तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों के रूप में दर्ज किया गया है।

लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने भी उन्हें औपचारिक रूप से अलग संसदीय दल के रूप में मान्यता नहीं दी है, हालांकि मानसून सत्र से पहले उनकी अलग बैठने की व्यवस्था की गई थी।

भाषा

राखी पवनेश

पवनेश