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सीबीआईसी कई सीजीएसटी क्षेत्राधिकार में पंजीकृत करदाताओं के लिए ‘फेसलेस’ आकलन व्यवस्था शुरू करेगा

नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) के तहत पंजीकृत और कई राज्यों में कारोबार करने वाले करीब दो लाख करदाताओं के लिए केंद्रीकृत आकलन व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसे अगले वित्त वर्ष से लागू किये जाने का प्रस्ताव है।

फिलहाल सीजीएसटी क्षेत्राधिकार में करीब 69.5 लाख ऐसे करदाता हैं जो केवल सीजीएसटी के तहत आते हैं। इनमें से करीब दो लाख करदाता एक राज्य के भीतर या अलग-अलग राज्यों में कई सीजीएसटी क्षेत्राधिकार के तहत आते हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारा इरादा आने वाले समय में कई सीजीएसटी क्षेत्राधिकार वाले इन करदाताओं के लिए केंद्रीकृत कर प्रशासन लाने का है। इसमें सीजीएसटी से जुड़े सभी कार्यों के लिए एकीकृत व्यवस्था होगी।’’

उन्होंने कहा कि सीजीएसटी करदाताओं के लिए रिटर्न की जांच, लेखापरीक्षा, निर्णय प्रक्रिया, अपील, करदाता सेवाओं और शिकायत निपटान के लिए एकल व्यवस्था के विचार को मंजूरी दी गयी है।

सीतारमण ने कहा कि सीजीएसटी करदाताओं के लिए ‘फेसलेस’ यानी अधिकारियों से सीधे संपर्क के बिना आकलन की रूपरेखा को परामर्श के लिए रखा जाएगा और इसे अगले वित्त वर्ष 2027-28 से लागू किया जाएगा।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कर नोटिस, सुनवाई और आदेश अलग-अलग कार्यालयों के बजाय राष्ट्रीय मंच पर निपटाए जाएंगे।

यह व्यवस्था फेसलेस आकलन की मौजूदा प्रणाली के समान होगी।

सीबीआईसी के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि ‘फेसलेस’ आकलन की रूपरेखा इस साल के अंत तक सार्वजनिक परामर्श के लिए रखी जाएगी।

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत करदाताओं को एकल संपर्क व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जीएसटी परिषद द्वारा तय फार्मूले के आधार पर सीजीएसटी और एसजीएसटी अधिकारियों के बीच बांटा गया है।

डेढ़ करोड़ रुपये से कम कारोबार वाले 90 प्रतिशत से अधिक करदाताओं का प्रशासनिक नियंत्रण राज्य कर प्रशासन के पास है। शेष 10 प्रतिशत करदाता केंद्रीय कर प्रशासन के अधीन हैं।

डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाले करदाताओं को केंद्रीय और राज्य कर प्रशासन के बीच बराबर-बराबर बांटा गया है।

योजना के तहत सीबीआईसी अपने क्षेत्राधिकार वाले करदाताओं के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था तैयार कर रहा है। इसमें नोटिस, सुनवाई और आदेश अलग-अलग कार्यालयों के बजाय एक राष्ट्रीय मंच के माध्यम से निपटाए जाएंगे।

भाषा रमण अजय

अजय