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शेयर बाजार में एआई केंद्रित निवेश अवसरों की कमी भारत की ताकत बनेगी : सीईए

मुंबई, आठ अक्टूबर (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय शेयर बाजार में कृत्रिम मेधा (एआई) पर केंद्रित निवेश अवसरों का अभाव, जिसे विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारणों में से एक माना जा रहा है, एक साल में भारत की ताकत बन सकता है और यही निवेशक देश की अन्य मजबूत आर्थिक बुनियाद पर दांव लगाने के लिए वापस आ सकते हैं।

एसबीआई-अमुंडी इंडिया इन्वेस्टर सेमिनार में नागेश्वरन ने कहा कि रुपये पर दबाव बना रहने की संभावना है और यह अपने अबतक के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर एआई का मौजूदा उछाल कमजोर पड़ता है, तो भारत को इसका फायदा मिल सकता है। एक साल बाद यह देखने को मिल सकता है कि भारतीय शेयर बाजार में एआई से जुड़े निवेश अवसरों का अभाव ही भारत की ताकत बन गया है।’’

नागेश्वरन ने कहा कि वैश्विक निवेशकों की नजर में भारत में एआई से जुड़े निवेश अवसरों का अभाव एक कमजोरी माना जाता है, लेकिन इस मामले में भारत को दूसरे कदम का लाभ मिल सकता है।

उन्होंने एआई को ‘उधार पर आधारित कहानी’ बताते हुए कहा कि एआई में गिरावट आने पर पूंजी ऐसे वृद्धि के अवसरों की तलाश करेगी, जो एआई पर निर्भर नहीं हों।

उन्होंने कहा कि मजबूत आर्थिक वृद्धि के कारण भारत ऐसा विकल्प होगा, जिसकी ओर निवेशक आएंगे।

नागेश्वरन ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि ऐसा होना केवल समय की बात है।'

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि उन्हें इस घटनाक्रम के होने को लेकर पूरा भरोसा है।

नागेश्वरन ने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति ‘आधे से अधिक भरे गिलास’ की तरह है।

उन्होंने कहा कि चार बाहरी कारकों ने भारत में पूंजी प्रवाह को प्रभावित किया है और रुपये में गिरावट का कारण बने हैं, हालांकि देश में कई मजबूत पक्ष भी हैं।

उन्होंने कहा कि इन प्रतिकूल कारकों में अमेरिका के साथ चुनौतीपूर्ण संबंध, एआई निवेश का अभाव, पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी शामिल हैं। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का भारत जैसे तेल आयातक देश पर सीधा असर पड़ता है।

नागेश्वरन ने कहा कि भारत के पक्ष में काम करने वाले कारकों में मजबूत आर्थिक वृद्धि शामिल है। देश हाल के वर्षों में लगातार लगे झटकों के बावजूद सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज करने में सफल रहा है। इसके अलावा चालू खाते का प्रबंधन योग्य घाटा, अच्छी पूंजी वाले बैंक, कंपनियों पर कम कर्ज और घरेलू बचत का पूंजी बाजारों की ओर बढ़ना भी भारत के पक्ष में हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘स्पष्ट रूप से, मौजूदा बुनियादी आर्थिक स्थिति विनिमय दर से मिलने वाले संकेत की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और स्वस्थ है।’’

भाषा योगेश अजय

अजय