कोलकाता, आठ अक्टूबर (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार ने मदरसा सेवा आयोग को समाप्त कर उसके राज्य स्कूल सेवा आयोग में विलय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे स्कूल सेवा आयोग के माध्यम से मदरसों में शिक्षकों की भर्ती का रास्ता साफ होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि मंत्रिमंडल की हाल ही में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया और इसे लागू करने से पहले कानून में बदलाव करना होगा।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी मंगलवार शाम एक कार्यक्रम में कहा था कि राज्य सरकार मदरसा सेवा आयोग को समाप्त करेगी। उन्होंने कहा था, ‘‘अब इसका पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) में विलय किया जाएगा।’’
स्कूल शिक्षा विभाग ने बताया कि राज्य विधानसभा में दो अलग-अलग विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। इनमें से एक में पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग अधिनियम को निरस्त करने और दूसरे में डब्ल्यूबीएसएससी अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव होगा।
शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विनोद कुमार ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हां, इस (विलय) के संबंध में इस साल कुछ किया जाएगा।’’
विधेयकों के विधानसभा से पारित होने के बाद इन्हें मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। इसके बाद राजपत्र अधिसूचना जारी की जाएगी।
कुमार ने कहा कि प्रस्तावित विलय के बाद मान्यता प्राप्त मदरसों में शिक्षकों की भर्ती डब्ल्यूबीएसएससी के ढांचे के तहत की जाएगी।
अधिकारियों ने कहा कि यह कदम शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और उसमें अधिक एकरूपता लाने के राज्य सरकार के प्रयासों की पृष्ठभूमि में उठाया गया है।
डब्ल्यूबीएसएससी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कानून में आवश्यक संशोधनों की अधिसूचना जारी होने के बाद ही आयोग भर्ती प्रक्रिया शुरू कर सकेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘भर्ती संशोधित अधिनियम के प्रावधानों और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार की जाएगी।’’
मदरसा सेवा आयोग की स्थापना 2007 में एक अलग कानून के तहत पश्चिम बंगाल के 614 मान्यता प्राप्त मदरसों में शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती करने के लिए की गई थी।
भाषा रंजन पवनेश
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