बेंगलुरु, आठ अक्टूबर (भाषा) एसआईआर की कवायद को लेकर निर्वाचन आयोग पर ‘‘पारदर्शिता और जवाबदेही का पूरी तरह अभाव’’ होने का आरोप लगाते हुए यूट्यूबर ध्रुव राठी ने बृहस्पतिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
राठी ने नागरिक संगठनों और कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) की ओर से बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में एसआईआर के खिलाफ किए जा रहे ‘जन-अदालत’ प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि वह एक आम नागरिक के तौर पर इस आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं।
राठी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि विरोध-प्रदर्शन में उनकी भागीदारी का मकसद सरकार में बदलाव लाना है।
उन्होंने कहा, “मैं यहां सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं आया हूं। न तो एलन मस्क और न ही जॉर्ज सोरोस ने मुझे पैसे दिए हैं। मैं यहां खुद के पैसों से आया हूं।”
राठी ने कहा कि ‘वोट चोरी’ का मुद्दा हर नागरिक से जुड़ा हुआ है, चाहे उनकी राजनीतिक संबद्धता कुछ भी हो।
उन्होंने कहा, “चाहे आप भाजपा को वोट दें, कांग्रेस को वोट दें या किसी और पार्टी का समर्थन करें, यह (‘वोट चोरी’) एक ऐसा मुद्दा है, जो देश के हर नागरिक से जुड़ा हुआ है।”
राठी ने इस बात पर जोर दिया कि वह किसी राजनीतिक दल की तरफ से विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा उन लोगों के लिए भी चिंता का विषय होना चाहिए, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करते हैं।
राठी ने कहा, “अगर आपको लगता है कि देश के हर नागरिक के पास वोट देने का अधिकार होना चाहिए, तो आपको भी हमारे उद्देश्य का समर्थन करना चाहिए और विरोध-प्रदर्शन में शामिल होना चाहिए।”
उन्होंने पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए दावा किया कि विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची से हजारों मतदाताओं के नाम हटा दिए गए और नतीजों की घोषणा के बाद उन्हें फिर से जोड़ दिया गया।
राठी ने दावा किया, “ये लोग असली और पात्र मतदाता थे। चुनाव से पहले और चुनाव के बाद इनके नाम मतदाता सूची में शामिल थे, लेकिन मतदान के समय वे सूची में नहीं थे।”
राठी ने कहा कि बिहार में लगभग 65 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने प्रभावित लोगों के नाम और पते तब तक जाहिर नहीं किए, जब तक कि उच्चतम न्यायालय ने यह जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश नहीं दिया।
राठी ने कहा, “जब तक कोई निर्वाचन आयोग से ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने के लिए नहीं कहता, तब तक आयोग खुद से कुछ भी उजागर नहीं करता। आयोग के कामकाज में कोई पारदर्शिता नहीं है। बिल्कुल भी पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं है।”
उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में लगभग 14 लाख लोगों के नाम जोड़े गए, लेकिन उनके नाम उजागर नहीं किए गए।
राठी ने दावा किया कि गोवा में मतदाता पंजीकरण अधिकारी लगभग 100 नाम जोड़ना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं किया जा सका, क्योंकि सॉफ्टवेयर में ऐसा करने के लिए कोई प्रावधान नहीं था।
उन्होंने आरोप लगाया, “मर्जी से नाम जोड़े जा रहे हैं, मर्जी से नाम हटाए जा रहे हैं। सब कुछ किसी की इच्छा के अनुसार किया जा रहा है।”
राठी ने पिछले 10 दिनों में जमीनी स्तर पर “सबूत” इकट्ठा करने के लिए कर्नाटक के नागरिक समाज संगठनों का धन्यवाद किया।
उन्होंने कहा कि इन संगठनों के सदस्यों ने अलग-अलग जिलों का दौरा किया, ऐसे लोगों से मुलाकात की, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे या जिन्हें मृत घोषित कर दिया गया था और उनमें से कुछ लोगों को सभा के सामने पेश किया।
राठी ने कहा, “इसीलिए मैं कहता हूं : ‘वोट चोर, कुर्सी छोड़।’ इसीलिए हम कहते हैं कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए।”
उन्होंने विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लेने वालों को देशभक्त कहकर उनकी तारीफ की, जबकि कुमार का बचाव करने वालों की आलोचना करते हुए उन्हें “राष्ट्र-विरोधी” करार दिया।
राठी ने अपने संबोधन के अंत में ‘वोट चोर, कुर्सी छोड़’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। उन्होंने लोगों से इन नारों को दोहराने की अपील की, ताकि “पूरी दुनिया की नजर इस विरोध-प्रदर्शन पर पड़ सके।”
भाषा पारुल रंजन
रंजन