नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 बृहस्पतिवार को प्रभाव में आ गया, जो सीएपीएफ में समूह-ए के जनरल ड्यूटी अधिकारियों और अन्य अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों के लिए एक सामान्य ढांचा प्रदान करता है।
सीएपीएफ अधिनियम, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के अधिकारियों की भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति और अन्य सेवा शर्तों के विनियमन का प्रावधान करता है।
बृहस्पतिवार को जारी एक अधिसूचना में, गृह मंत्रालय ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार 08 अक्टूबर, 2026 को उस तिथि के रूप में तय करती है जिस दिन से उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।’’
इस कानून के तहत, महानिरीक्षक (आईजी) रैंक के 50 प्रतिशत पद भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) से प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाने हैं, जबकि अपर महानिदेशक (एडीजी) स्तर के कम से कम 67 प्रतिशत पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाने हैं।
विशेष महानिदेशक और महानिदेशक रैंक के पद केवल प्रतिनियुक्ति के माध्यम से ही भरे जाने हैं।
यह अधिनियम सीएपीएफ में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति पर आए उच्चतम न्यायालय के एक फैसले की पृष्ठभूमि में आया है। पिछले साल अक्टूबर में, शीर्ष अदालत ने केंद्र की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उसके 2025 के फैसले की समीक्षा का अनुरोध किया गया था। उस फैसले में निर्देश दिया गया था कि सीनियर प्रशासनिक ग्रेड (एसएजी) स्तर तक सीएपीएफ में आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को ‘क्रमशः कम’ किया जाना चाहिए।
अदालत ने कहा था कि सीएपीएफ कैडर में एसएजी स्तर तक प्रतिनियुक्ति के लिए आरक्षित पदों की संख्या को दो साल की बाहरी सीमा के साथ समय के साथ क्रमिक रूप से कम किया जाना चाहिए।
इस कानून के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में कहा गया था कि सीएपीएफ की बढ़ती कार्यात्मक और परिचालन आवश्यकताओं के कारण बलों के लिए एक विशिष्ट संगठनात्मक ढांचा तैयार हुआ है।
सेवानिवृत्त सीएपीएफ अधिकारियों के एक समूह ने भी उच्चतम न्यायालय के अक्टूबर 2025 के आदेश के कथित गैर-कार्यान्वयन को लेकर तत्कालीन गृह सचिव गोविंद मोहन के खिलाफ अवमानना याचिका के साथ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
भाषा वैभव नरेश
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