चंडीगढ़, आठ अक्टूबर (भाषा) हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व विपक्ष के नेताओं और अन्य प्रमुख लोगों ने बृहस्पतिवार को दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर शोक जताया।
‘खामोशी’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में अपने बहुमुखी अभिनय के लिए मशहूर पाटेकर का बृहस्पतिवार तड़के गोवा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 76 वर्ष के थे।
हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘बहुमुखी और बेहद प्रतिभाशाली अभिनेता श्री नाना पाटेकर जी के निधन से गहरा दुख हुआ। उनका बेहतरीन अभिनय और दमदार आवाज हमेशा उनके प्रशंसकों के दिलों में बसी रहेगी। शोक संतप्त परिवार के सदस्यों, दोस्तों और उनके अनगिनत प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। उनकी आत्मा को अनंत शांति मिले। ओम शांति!’’
मुख्यमंत्री सैनी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा कर कहा कि पाटेकर का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है और उनके यादगार किरदार हमेशा लोगों के जेहन में रहेंगे।
सैनी ने कहा, ‘‘उन्होंने अपने शानदार अभिनय, प्रभावशाली व्यक्तित्व और सामाजिक कार्यों के प्रति समर्पण से कला की दुनिया में एक अमिट छाप छोड़ी।’’
केंद्रीय मंत्री और करनाल के सांसद मनोहर लाल ने कहा कि अभिनेता की दमदार और जीवंत अदाकारी ने भारतीय सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ी है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘सामाजिक कार्यों के प्रति उनका समर्पण और सेवा की भावना हमेशा प्रेरणादायक बनी रहेगी।’’
कांग्रेस नेताओं भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी सैलजा, रणदीप सिंह सुरजेवाला और राज बब्बर ने भी मशहूर अभिनेता के निधन पर शोक व्यक्त किया।
हुड्डा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि किसानों के कल्याण के प्रति पाटेकर का समर्पण और उनका सादगी भरा स्वभाव हमेशा लोगों के दिलों में बना रहेगा।
कांग्रेस नेता राज बब्बर ने सिनेमा में बिताए वर्षों के दौरान पाटेकर के साथ की अनगिनत यादों को ताजा किया।
बब्बर ने कहा, ‘‘वह बागी हमेशा के लिए चला गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘नाना पाटेकर जी को याद करने पर सिनेमा में उनके साथ बिताए वर्षों की अनगिनत यादें ताजा हो जाती हैं। मुझे ‘आज की आवाज’ साफ तौर पर याद है। वह मुख्यधारा की हिंदी सिनेमा में उनके लिए पहला बड़ा मौका था और इसमें हमने पहली बार साथ काम किया था। इसके बाद हमने साथ मिलकर कई खुशियां और संघर्ष देखे।’’
बब्बर ने कहा कि पाटेकर एक असाधारण अभिनेता होने के साथ बेहद संवेदनशील इंसान भी थे और जिन सामाजिक मुद्दों के लिए काम करते थे, उनके प्रति पूरी तरह समर्पित रहे।
भाषा प्रचेता पवनेश
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