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भारत दुनिया का 20 प्रतिशत डेटा पैदा करता है, लेकिन डेटा सेंटर की क्षमता केवल तीन प्रतिशत: जोशी

नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर (भाषा) वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत वैश्विक डेटा का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा पैदा करता है, लेकिन यहां वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता का केवल 3 प्रतिशत हिस्सा ही मौजूद है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस असमानता के कारण भारतीय अनुसंधानकर्ताओं, स्टार्ट-अप और सार्वजनिक संस्थानों को विदेशी प्लेटफॉर्मों पर निर्भर रहना पड़ता है।

पद्म विभूषण से सम्मानित जोशी यहां 21वें फिक्की उच्च शिक्षा शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत वैश्विक डेटा का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा उत्पन्न करता है, लेकिन वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता का केवल 3 प्रतिशत ही उसके पास है। इस असंतुलन के कारण भारतीय शोधकर्ताओं, स्टार्ट-अप और सार्वजनिक संस्थानों को विदेशी कंप्यूटिंग संसाधनों और प्लेटफॉर्मों पर निर्भर रहना पड़ता है।’’

जोशी ने रेखांकित किया कि भारत कृत्रिम बुद्धमत्ता (एआई) निवेश में वैश्विक स्तर पर शीर्ष 10 देशों में शामिल है और 2025 की ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी रैंकिंग में तीसरे स्थान पर है।

उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया की 16 प्रतिशत एआई प्रतिभा और 40 लाख से अधिक आईटी पेशेवरों के साथ, यह (भारत) एआई के कार्यान्वयन के लिए एक पावरहाउस है। देश तेजी से अपना खुद का एआई ढांचा बना रहा है।’’

जोशी ने चेतावनी दी कि शिक्षा को पूरी तरह तकनीकी प्रक्रिया नहीं माना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय शिक्षा प्रणाली एक ऐसी दुनिया के निर्माण में विश्वास रखती है जहां मानव विकास के सभी पहलू—भौतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक—सामंजस्यपूर्ण हों।’’

बृहस्पतिवार को यहां भारत मंडपम में शुरू हुआ यह दो दिवसीय शिखर सम्मेलन ‘‘एक नई विश्व व्यवस्था के लिए उच्च शिक्षा: सुधार, लचीलापन और प्रासंगिकता’’ की थीम पर आधारित है।

भाषा वैभव नरेश

नरेश