पारादीप, आठ अक्टूबर (भाषा) भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने बृहस्पतिवार को ओडिशा तट के पास 12वां राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास (एसएआरईएक्स-2026) किया, जिसमें समुद्र में बड़े पैमाने के बचाव अभियानों के लिए समन्वित प्रतिक्रिया क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया।
राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड (एनएमएसएआरबी) के तत्वावधान में ओडिशा तट पर पहली बार आयोजित इस अभ्यास का विषय ‘खोज एवं बचाव तैयारियों और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल’ था।
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने बुधवार को इस अभ्यास का उद्घाटन किया।
अधिकारियों ने बताया कि इस अभ्यास में तटरक्षक बल के 15 जहाज, तीन डोर्नियर विमान, तीन उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच), एक चेतक हेलीकॉप्टर, भारतीय वायुसेना का एक सी-130जे और एक एमआई-17 विमान, भारतीय नौसेना के दो जहाज और कई असैन्य व सरकारी संसाधन शामिल किए गए।
उन्होंने बताया कि पारादीप तट से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर आयोजित एसएआरईएक्स-2026 में समुद्री और हवाई एजेंसियों ने बड़े पैमाने के बचाव अभियानों के लिए परिचालन तैयारियों, आपसी समन्वय और संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमता का प्रदर्शन किया।
अधिकारियों के मुताबिक, आईसीजी निदेशक जनरल परमेश शिवमणि ने इस अभ्यास का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि 30 देशों के 32 पर्यवेक्षक इस अभ्यास के गवाह बने।
एक अधिकारी ने कहा, “30 देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में एक अहम कदम है और यह क्षेत्र में एक भरोसेमंद समुद्री खोज एवं बचाव अभियान साझेदार के तौर पर भारत की भूमिका की फिर से पुष्टि करती है।”
उन्होंने बताया कि एसएआरईएक्स-2026 में भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, भारतीय जहाजरानी निगम, नौवहन महानिदेशालय, मत्स्य विभाग, सीमा शुल्क विभाग, समुद्री पुलिस, पारादीप पत्तन प्राधिकरण और ओडिशा सरकार सहित अन्य एजेंसियों ने हिस्सा लिया।
आईसीजी ने कहा कि एसएआरईएक्स-2026 ने मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को परखने, परिचालन संबंधी कमियों की पहचान करने और अभ्यास से मिली सीख को भविष्य की खोज एवं बचाव तैयारियों में शामिल करने का मौका दिया।
भाषा पारुल नरेश
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