गुवाहाटी, आठ अक्टूबर (भाषा) रायजोर दल के सदस्यों ने बृहस्पतिवार को असम सचिवालय और मंत्रियों के आवास के पास कई प्रदर्शन किए और राज्य के पूर्वी जिलों में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अधिक और जल्द मुआवजा देने की मांग की।
इस बीच, पार्टी अध्यक्ष और शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई का अनिश्चितकालीन धरना सातवें दिन में प्रवेश कर गया।
विपक्षी दल के सदस्य अपना विरोध दर्ज कराने के लिए सुबह से ही अलग-अलग समय पर सचिवालय के पास तीन-चार जगहों पर 50 से 100 लोगों के समूहों में इकट्ठा हुए। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने उनकी कोशिशों को नाकाम कर दिया और कई प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में ले लिया।
वहीं, प्रदर्शनकारियों को सुरक्षाकर्मियों के साथ हाथापाई करते देखा गया। सुरक्षाकर्मियों ने उनमें से कुछ को खींचकर बसों में बिठाया और वहां से ले गए।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि असम के पूर्वी इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ को ढाई महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित लोगों को पर्याप्त आर्थिक सहायता देने में नाकाम रही है।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘‘ जो हमारा हक है, उसे मांगने के लिए हमें अपने घरों से यहां आना पड़ा। बाढ़ में सब कुछ खो देने के बाद सरकार ने हमें अपने हाल पर छोड़ दिया है।’’
दो अक्टूबर से राज्य विधानसभा परिसर में ‘‘अनिश्चितकालीन सत्याग्रह’’ कर रहे गोगोई ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान पार्टी के कई नेता घायल हुए हैं।
उन्होंने हिरासत में लिए गए नेताओं की अस्पताल में इलाज की तस्वीरें साझा कीं और आरोप लगाया कि घायलों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में काफी देरी हुई।
विधायक ने कहा, ‘‘हम अपना आंदोलन तब तक जारी रखेंगे, जब तक सरकार वित्तीय सहायता के समयबद्ध वितरण की घोषणा नहीं करती।’’
उन्होंने सोमवार को कहा था कि अगर मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा सात अक्टूबर तक सहायता राशि के समयबद्ध वितरण की घोषणा नहीं करते हैं तो उनका प्रदर्शन जन आंदोलन में बदल जाएगा।
गोगोई ने कहा था, ‘‘मुख्यमंत्री को रिकॉर्ड पर यह कहना चाहिए कि शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों के सभी बाढ़ प्रभावित परिवारों को 15,000 रुपये की अंतरिम सहायता उनकी घोषणा के 24 घंटे के भीतर दी जाएगी। शिवसागर और चराइदेव के परिवारों के लिए उन्होंने 10,000 रुपये के अतिरिक्त मुआवजे की जो घोषणा की है, उसका भुगतान 48 घंटे के भीतर किया जाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा था, ‘‘इन तीनों जिलों के लिए हमने प्रति परिवार न्यूनतम 10 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है, जिसे 31 अक्टूबर तक दिया जाना चाहिए। राज्य सरकार को इस साल आई बाढ़ के कारणों की सीबीआई जांच का आश्वासन भी देना चाहिए।’’
भाषा प्रचेता अविनाश
अविनाश