तिरुवनंतपुरम, आठ अक्टूबर (भाषा) तिरुवनंतपुरम के महापौर वी वी राजेश, निगम सचिव और भाजपा पार्षद के खिलाफ कथित जाली हस्ताक्षर के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, म्यूजियम थाने में राजेश, निगम पार्षद सुगाथन के. और तिरुवनंतपुरम निगम सचिव के खिलाफ बुधवार रात माकपा पार्षद एस पी दीपक की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया।
पुलिस के मुताबिक, सुगाथन को कई आपराधिक मामलों में कथित रूप से शामिल होने के बाद केरल असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (कापा) के तहत हिरासत में लिया गया था।
प्राथमिकी के अनुसार, आरोपियों ने इस साल 26 फरवरी, 11 मार्च और 27 अप्रैल को हुई निगम परिषद की बैठकों की उपस्थिति पुस्तिका में सुगाथन के जाली हस्ताक्षर की साजिश रची।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि केरल नगरपालिका अधिनियम के तहत निर्धारित परिस्थितियों में परिषद की बैठकों से लंबे समय तक अनुपस्थित रहने पर अयोग्यता हो सकती है।
पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि सुगाथन को अयोग्य होने से बचाने के लिए जाली हस्ताक्षर किए गए थे।
दीपक ने दावा किया कि चुनाव के नामांकन पत्रों पर सुगाथन के हस्ताक्षर और परिषद की बैठक की उपस्थिति पुस्तिका में दर्ज हस्ताक्षर अलग-अलग हैं।
मामला भारतीय न्याय संहिता की जालसाजी, आपराधिक साजिश और फर्जी दस्तावेज बनाने से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
सुगाथन को केरल उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद हाल में जेल से रिहा किया गया था।
एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस जल्द ही निगम से संबंधित दस्तावेज जमा करने को कहेगी और आरोपियों के बयान दर्ज करेगी।
इस बीच, महापौर ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से बृहस्पतिवार को दीपक को कानूनी नोटिस भेजा।
कानूनी नोटिस में कहा गया है, ‘‘आपके आरोप पूरी तरह निराधार हैं। प्रेस वार्ता आयोजित कर इस तरह के झूठे आरोप लगाकर आपने जानबूझकर तिरुवनंतपुरम के महापौर का व्यक्तिगत जीवन और आधिकारिक हैसियत, दोनों में गंभीर अपमान, मानहानि और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है।’’
नोटिस में कहा गया है कि मेरे मुवक्किल के खिलाफ इस तरह के निराधार आरोप गढ़कर और उन्हें सार्वजनिक करके आपने उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने तथा उनके नेतृत्व वाले निगम की गरिमा पर सवाल उठाने का प्रयास किया है।
कानूनी नोटिस में कहा गया है, ‘‘फिर भी, यदि आप मुकदमेबाजी के बिना इस मामले को सुलझाना चाहते हैं, तो इस नोटिस की प्राप्ति के 15 दिन के भीतर मेरे मुवक्किल, सम्मानित मेयर, को हुए नुकसान के मुआवजे के तौर पर पांच करोड़ रुपये देने और उसकी रसीद प्राप्त करने के लिए आपको कहा जाता है।’’
इसमें कहा गया है कि ऐसा नहीं करने पर मेरे मुवक्किल कानून के तहत उचित प्रक्रिया के माध्यम से उक्त राशि वसूलने के लिए बाध्य होंगे और इससे होने वाले सभी नुकसान, लागत और खर्च के लिए आपको व्यक्तिगत रूप से तथा अपनी संपत्तियों के साथ जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
भाषा रंजन सुरेश
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