नयी दिल्ली, 8 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली पुलिस ने 'दिव्यांगजन' (पीडब्ल्यूडी) श्रेणी के तहत दाखिले के लिए कथित तौर पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कर नौ लोगों को पकड़ा है और 27 प्रमाणपत्र बरामद किए हैं। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
उत्तर दिल्ली की पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) निहारिका भट्ट ने बताया कि पैसे लेकर 'पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज' (पीडब्ल्यूडी) के फर्जी प्रमाणपत्रों का इंतजाम कर जेबीटी, बी.टेक और अन्य स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला दिलाने में कथित तौर पर मदद करने वाले एक व्यक्ति की सूचना मिली थी जिसके बाद पुलिस ने इस गिरोह का भंडाफोड़ किया।
उन्होंने कहा कि जांच की शुरुआत 31 अगस्त को अलीगढ़ निवासी और वर्तमान में फरीदाबाद में रह रहे ललित कुमार उर्फ आदित्य (36) को पकड़ने के साथ हुई और उसके पास से उत्तर प्रदेश के बदायूं, बरेली और सिद्धार्थनगर के सरकारी अस्पतालों द्वारा सुनने में असमर्थता, लोकोमोटर दिव्यांगता और कम दृष्टि से संबंधित जारी 16 पीडब्ल्यूडी प्रमाणपत्र, तीन मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया गया।
पुलिस के अनुसार, मामले में पकड़े गए आरोपियों की पहचान मुख्य आरोपी ललित कुमार उर्फ आदित्य के अलावा, बरेली में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ( सीएमओ) कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर कुलदीप (28), बदायूं निवासी शेर सिंह सोलंकी (40), बरेली में दिव्यांग बोर्ड के सदस्य डॉ. लक्ष्मी कांत सक्सेना (60) , वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक एवं सिद्धार्थ नगर निवासी जय प्रकाश शुक्ला (48), सीतापुर में रहने वाले आदेश सिंह (26) सीतापुर, देवरिया सीएमओ कार्यालय में कनिष्ठ सहायक धीरेंद्र (32), नोएडा में शिक्षा संबंधी कंसल्टेंसी के संचालक रोशन कुमार (34), और सिद्धार्थ नगर निवासी सुरेंद्र रस्तोगी (33) के रूप में हुई है।
डीसीपी ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से 27 फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र, एक लैपटॉप, एक मैकबुक, सीएमओ कार्यालय से एक डेस्कटॉप, 11 मोबाइल फोन, 75,000 रुपये नकद और एक मर्सिडीज कार बरामद की गई है।
अधिकारी के मुताबिक, जांच में सामने आया कि गिरोह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) टूल का उपयोग कर आधार कार्ड पर पते बदलकर उन्हें उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों का कर देता था और इसके बाद यूडीआईडी पोर्टल पर आवेदन अपलोड किए जाते थे और सीएमओ कार्यालय के कर्मचारियों व डॉक्टरों की मिलीभगत से 20,000 से 30,000 रुपये प्रति प्रमाणपत्र लेकर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी कराए जाते थे।
पुलिस ने बताया कि इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल दाखिले के लिए किया जाता था। मामले में अन्य आरोपियों की संलिप्तता की आगे की जांच जारी है।
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