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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति संबंधी भारतीय युवा कांग्रेस की याचिका पर शुक्रवार को होगी सुनवाई

नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) की उस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी गई है।

याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध बृहस्पतिवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ के समक्ष किया गया।

अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि याचिका को शुक्रवार को सूचीबद्ध किया जाएगा और यदि ऐसा नहीं होता है तो वे फिर से इस मामले को उठा सकते हैं।

भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के माध्यम से दिल्ली पुलिस द्वारा एक अक्टूबर को जारी किए गए उस पत्र को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया है जिसमें जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया है।

आईवाईसी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है।

याचिका में कहा गया कि यह प्रक्रिया इस बात पर सवाल खड़े करती है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन आयोजित करने के आवेदन पर विचार करते समय पुलिस अधिकारी संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) और 19(1)(बी) के तहत नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों को किस तरह नियंत्रित कर सकते हैं।

इसमें कहा गया है कि प्रस्तावित प्रदर्शन संवैधानिक संस्थाओं की पारदर्शिता, जवाबदेही और कामकाज को लेकर उठी चिंताओं के मद्देनजर आयोजित किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने इसे अपने भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्र होने के अधिकार के तहत एक शांतिपूर्ण गतिविधि के रूप में प्रस्तावित किया था।

आईवाईसी ने करीब 100-150 लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए 25 सितंबर को दिल्ली पुलिस को आवेदन दिया था। यह प्रदर्शन एक अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक प्रस्तावित था।

आईवाईसी ने कहा कि उसने सुरक्षा, यातायात, अनुशासन और सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित सभी कानूनी शर्तों का पालन करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उसका अनुरोध खारिज कर दिया गया।

याचिकाकर्ता इस बात से इनकार नहीं करता कि राज्य को सार्वजनिक व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा तथा निवासियों और आम लोगों के अधिकारों के हित में सभाओं को नियंत्रित करने का अधिकार है। हालांकि, आपत्ति इस बात को लेकर है कि इस तरह का नियमन किस तरीके से और किस हद तक किया जा सकता है।

भाषा

प्रचेता सुरेश

सुरेश