मॉस्को, आठ अक्टूबर (एपी) रूस की मानव कल्याण निगरानी संस्था ‘रोस्पोत्रेबनाद्जोर’ ने सर्बिया में संदिग्ध ‘न्यूमोनिक प्लेग’ के कारण दम तोड़ने वाली प्रयोगशाला कर्मी से अन्य व्यक्ति में संक्रमण फैलने से बृहस्पतिवार को इनकार किया।
‘रोस्पोत्रेबनाद्जोर’ का यह बयान ‘न्यूमोनिक प्लेग’ के संक्रमण को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है।
रूसी एजेंसी ने कहा कि दक्षिण-पूर्वी सर्बिया के इर्कुत्स्क में एक प्लेग अनुसंधान संस्थान की प्रयोगशाला में काम करने वाली महिला की मौत निमोनिया के अज्ञात स्वरूप के संक्रमण के कारण हुई।
उसने कहा कि “व्यापक” जांच में इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि महिला कर्मी उन रोगाणुओं में से किसी एक की चपेट में आ गई थी, जिन पर वह साइबेरिया की प्रयोगशाला में काम कर रही थी।
‘रोस्पोत्रेबनाद्जोर’ के मुताबिक, उसने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को भी सूचित किया है कि इर्कुत्स्क क्षेत्र में प्लेग का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।
एजेंसी ने मीडिया में आई उन खबरों को फर्जी बताते हुए खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया है कि संक्रमित प्रयोगशाला कर्मी के संपर्क में आने के बाद एक और व्यक्ति भी इस संक्रमण का शिकार हो गया है।
हालांकि, ‘रोस्पोत्रेबनाद्जोर’ ने लैब कर्मी की बीमारी या मौत की परिस्थितियों और क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आपातकालीन उपाय किए जाने की वजहों के बारे में कुछ नहीं बताया।
डब्ल्यूएचओ के महामारी और वैश्विक महामारी प्रबंधन विभाग की निदेशक मारिया वान केरखोव ने बुधवार को कहा था कि स्वास्थ्य निकाय को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि दो अक्टूबर को महिला की मौत किस वजह से हुई। हालांकि, रूसी मीडिया में आई कुछ अपुष्ट खबरों में ‘न्यूमोनिक प्लेग’ को महिला की मौत का कारण बताया गया है।
केरखोव ने रूस से इस मामले के बारे में और जानकारी देने को कहा।
‘न्यूमोनिक प्लेग’ फेफड़ों का एक गंभीर संक्रमण है, जो ‘यरसीनिया पेस्टिस’ नामक जीवाणु के कारण होता है। यह संक्रमण पीड़ित व्यक्ति के छींकने, खांसने या बोलने के दौरान उनके नाक-मुंह से निकलने वाले तरल पदार्थ के संपर्क में आने से फैलता है।
‘न्यूमोनिक प्लेग’ के लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, खांसी और खून वाली खांसी शामिल है। ये लक्षण आमतौर पर संक्रमण के संपर्क में आने के तीन से सात दिन बाद उभरना शुरू होते हैं।
एपी पारुल रंजन
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