चेन्नई, आठ अक्टूबर (भाषा) सरकार करीब 25 गीगावाट की उन पवन ऊर्जा परियोजनाओं को फिर से सक्रिय करने के लिए रणनीति बना रही है, जिनके इस्तेमाल की समयसीमा खत्म होने के करीब पहुंच गई है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
जोशी ने कहा कि ये परियोजनाएं दशकों पहले उस समय उपलब्ध प्रौद्योगिकी के आधार पर स्थापित की गई थीं। इनके पुराने हिस्सों को आधुनिक प्रौद्योगिकी से बदलकर इन्हें फिर से सक्रिय करने से परियोजनाओं की दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने पवन ऊर्जा पर केंद्रित सम्मेलन ‘विंडर्जी इंडिया 2026’ को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘इन परियोजनाओं के इस्तेमाल की समयसीमा खत्म होने के करीब पहुंच गई हैं। इनके हिस्से पुराने हो रहे हैं, इसलिए हम इन्हें फिर से सक्रिय करने के लिए प्रयास कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि इस तरह की पवन ऊर्जा क्षमता करीब 25 गीगावाट है। हालांकि, उन्होंने इन परियोजनाओं के स्थान समेत अन्य विवरण नहीं दिए। तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता के मामले में अग्रणी राज्य हैं।
भारत की परिचालन पवन ऊर्जा क्षमता करीब 59 गीगावाट है और देश 2030 तक 100 गीगावाट की पवन ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश में 6.05 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई थी।
चालू वित्त वर्ष में क्षमता वृद्धि इससे अधिक रहने की उम्मीद है। पहली छमाही के दौरान करीब तीन गीगावाट क्षमता जोड़ी गई है।
जोशी ने उद्योग से इन पुरानी परियोजनाओं को नए सिरे से सक्रिय करने को लेकर सुझाव भी मांगा, जिनके आधार पर रणनीति तैयार की जा सके।
उन्होंने कहा कि अधिकतम बिजली मांग में हो रही बढ़ोतरी को पूरा करने में पवन ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। देश में अधिकतम बिजली मांग 2030 तक बढ़कर 459 गीगावाट तक पहुंच जाने का अनुमान है।
भारतीय पवन चक्की विनिर्माता संघ (आईडब्ल्यूटीएमए) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी आदित्य प्यासी ने महत्वपूर्ण कलपुर्जों के स्थानीय स्तर पर विनिर्माण पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि उद्योग को अधिक क्षमता वाली पवन चक्कियों की ओर बढ़ते हुए महत्वपूर्ण कलपुर्जों के स्वदेशीकरण में तेजी लाने के साथ बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विनिर्माण क्षमता भी बढ़ानी होगी।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, ‘विंडर्जी इंडिया सम्मेलन’ में 20 से अधिक देशों के करीब 400 प्रदर्शक और 500 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। डेनमार्क, जर्मनी तथा स्पेन के लिए अलग-अलग देश मंडप भी बनाए गए हैं।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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