ईटानगर, चार सितंबर (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले के बोरदुमसा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को हिंसा भड़कने के बाद इलाके में तनाव फैल गया। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
बोरदुमसा के अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) सबदम तायंग ने बताया कि बिजयपुर के लिए दावा और आपत्ति निपटाने संबंधी सुनवाई तीन सितंबर को पंचायत भवन में शुरू हुई थी। यह सुनवाई प्रपत्र-6 और प्रपत्र-7 के तहत की जा रही थी।
उन्होंने बताया कि कुछ युवाओं के व्यवधान के बाद सुनवाई स्थगित कर दी गई और इसे चार सितंबर को एडीसी कार्यालय में दोबारा निर्धारित किया गया।
तायंग ने कहा, ‘‘जब सुनवाई दोबारा शुरू हुई तो ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (एएपीएसयू) के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे लोगों के एक समूह ने 2006 के बाद मतदाता सूची में शामिल चकमा और हाजोंग समुदाय के मतदाताओं के नाम हटाने की मांग करते हुए कथित तौर पर कार्यालय का गेट तोड़ दिया, जबरन अंदर प्रवेश किया और कार्यवाही बाधित की।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय परिसर में तोड़फोड़ की और उनके साथ हाथापाई की। साथ ही सुनवाई में शामिल चकमा और हाजोंग समुदाय के लोगों पर पथराव किया।
तायंग ने बताया कि इसके बाद दोनों पक्षों के बीच पथराव हुआ, जिसमें एएपीएसयू के एक स्वयंसेवक के सिर में चोट लगी।
उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
वहीं, एएपीएसयू के अध्यक्ष मेजे ताकू ने आरोप लगाया कि क्षेत्र का दौरा कर रही यूनियन की ‘‘उच्च स्तरीय समिति’’ को हिंसा में निशाना बनाया गया।
ताकू ने दावा किया कि पुलिस के आंसू गैस के गोले या हथियारों से चोट लगने की बात कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार किया गया दुष्प्रचार है। उन्होंने आरोप लगाया कि एएपीएसयू सदस्यों पर चाकू और दाव से हमला किया गया।
ताकू ने कहा, ‘‘उन्होंने लड़ाई शुरू की है और हम इसे खत्म करेंगे। हमने उन्हें मेहमान समझकर रहने की जगह, पानी और भोजन दिया, लेकिन आज वे घर के मालिकों को ही निशाना बना रहे हैं।’’
उन्होंने यूनियन के सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं करने की मांग की।
उन्होंने कुछ स्थानीय अधिकारियों पर चकमा और हाजोंग समुदायों के प्रति ‘‘पक्षपात और भाई-भतीजावाद’’ का आरोप लगाते हुए कहा कि एएपीएसयू ऐसे अधिकारियों की सूची सौंपेगा और उनके तत्काल निलंबन की मांग करेगा।
एएपीएसयू ने 12 सितंबर को ईटानगर में आपात बैठक भी बुलाई है, जिसमें स्वदेशी समुदायों के शीर्ष संगठनों, सामुदायिक संगठनों, छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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